याद उसकी इस कदर तड़पाने लगी,
बातें उसकी बस जहन में आने लगी।
सीमाओं से बँधा मन तड़प उठता,
जब भी अकेलापन महसूस होता।
बंदिशों पर सख्त पहरे लगे थे,
जब भी तोड़ी कमरे में कैद आवाज मिली।
कभी कप टूटा,कभी प्यालियों की आवाज,
कानों को बेहिसाब मिली।
कभी टमाटर कभी कद्दू संग प्याज मिली,
उसकी हँसी की चमक बेशुमार दिखी।
छेड़ा था सखी ने पहुँचो बस तुरन्त,
वरना विछोह की कहानी सुर-ताल मिली।
तसल्ली जानकर हुई बेशक एक कोना
है उसके दिल में अपना भी,
तड़प पहले से भी ज्यादा इस बार मिली॥
#शालिनी साहू
परिचय : शालिनी साहू इस दुनिया में १५अगस्त १९९२ को आई हैं और उ.प्र. के ऊँचाहार(जिला रायबरेली)में रहती है। एमए(हिन्दी साहित्य और शिक्षाशास्त्र)के साथ ही नेट, बी.एड एवं शोध कार्य जारी है। बतौर शोधार्थी भी प्रकाशित साहित्य-‘उड़ना सिखा गया’,’तमाम यादें’आपकी उपलब्धि है। इंदिरा गांधी भाषा सम्मान आपको पुरस्कार मिला है तो,हिन्दी साहित्य में कानपुर विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान पाया है। आपको कविताएँ लिखना बहुत पसंद है।