जहाँ मिलती है अम्बर और धरती वो क्षितिज कहलाता है निराला सा है बंधन भ्रम हो के भी सबको भाता है दिखता है दूर मगर पर मुकम्मल सा नजर आता है न होके भी दिखाई दे ऐसा बंधन सबको भाता है स्वार्थ के जहान में यथार्थ का है दर्शन काश […]

सशक्त है बदलाव में धरा का दर्द ज्ञात नहीं जुड़ाव संस्कृति से था जो वो हमे अब भाता नहीं बदलाव सिर्फ बदलाव अच्छे से बुरे की ओर जा रहे ओर मान रहे बदलाव इस बदलाव ने धरा का छीन लिया मान दर्द सिर्फ धरा का नहीं शीन हो गए सभी […]

एक विवाहिता जिसने विवाहित जीवन की शुरुआत में ही अपने सुहाग को खो दिया उसके मन के भाव नैनो में सजाये थे कुछ ख्वाब समय की ठोकर ने उन सपनो को चकनाचूर किया ज़िंदगी ने ही मुझे वक़्त न दिया कुछ सहेज लू कुछ समेट लू कुछ बातो को दिल […]

तू अंश नहीं मेरा फिर भी मेरा वजूद है सबब है ज़ीने का मेरे तू मेरा अच्छा नसीब है जुस्तजू थी मेरी जब तक तुझे न पाया था तेरे आने पर हर दिन दीवाली सा मनाया था तू नहीं था जब जीवन में मेरे तब मन में एक अहसास आया […]

सिमट रही थी तेरे आगोश में प्यार पाने को मगर तेरी जुस्तजू तो कोई और थी निगाहे मिलाने से कशिश नहीं आती और दूर जाने से रौनके नहीं मिट जाती हमने प्यार में धोखा खाया जिसे समझा अपना उसे गैर पाया जिसको समझ रहे थे नाकारा उसे तो तुमने सर […]

किसान अन्नदाता पर दुर्भाग्य ऐसा की उसके हिस्से में ही अन्न नहीं आता कैसा भाग्य ,कैसी नियती ,कैसा तक़दीर का खेल अन्न दाता ही खुद अन्न के एक एक दानें को तरस जाता कर्ज ,भूख और मौत तीनो का अन्नदाता से गहरा नाता भूख और कर्ज से झुकी कमर कोशिशे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।