नफरत  

0 0
Read Time4 Minute, 23 Second
mohsin
किसी ने न जलाई मोमबत्ती,
अफ़ज़रुल ख़ान के लिए
कोई भी न लड़ सकता
उसके हताश,बेसहारा,
परिवार के लिए।
एक धधकता हुआ समाचार
बनकर रह गई उसकी निर्मम हत्या,
एक सीमित समुदाय तक
जुड़कर रह गई संवेदनाएँ।
क्योंकि वो एक मज़दूर था,
वह बड़ा मजबूर था
बिलख रहे हैं अब भी,
उसके परिवार के सदस्य
नींदें टूट जाती हैं उसके ख़्याल से
उसके ख़ून की धार,
उसके घर की दहलीज़ छूती है
जले हुए शव की बदबू,
घर के आसपास बस गई है
उतर गयी है बदबू ज़हनों तक,
एक ख़ौफ़ घेरे हुए है परिवार को
अब ज़मीन छोड़ देना चाहते हैं सब,
लेकिन उसकी यादें गहरे में धँस गई हैं
सबके भीतर,
उससे कैसे छुड़ाया जाए पीछा ?
अफ़ज़रुल ये सब देख रहा है
आसमान से,
उसके साथ पहलू ख़ान और
जुनेद भी खड़े हैं
और भी कई लोग खड़े हैं
गुजरात के दंगों में मारे गए ये निर्दोष।
ये सब तब भी कुछ न बोल सके थे,
अब भी कुछ न बोल पा रहे हैं
एक बेबसी और मुर्दारी छाई हुई है
इंसानों की जमात पे,
नफ़रत ने क़ब्ज़ा जमाया है
सियासत का रंग लेकर।
अब कोई भी नहीं जलाए मोमबत्ती
इनकी हत्याओं के विरोध में,
मोमबत्ती जलाने से बेहतर है
इनके घर के चूल्हे उन हत्यारों से
जलवाए जाएं,
जो इनके घर हमेशा के लिए
नफ़रत का अंधेरा बो गए॥

                                                        #डॉ. मोहसिन ख़ान

परिचय : डॉ. मोहसिन ख़ान (लेफ़्टिनेंट) नवाब भरुच(गुजरात)के निवासी हैं। आप १९७५ में जन्मे और मध्यप्रदेश(वर्तमान में महाराष्ट्र)के रतलाम से हैं। आपकी शैक्षणिक योग्यता शोधोपाधि(प्रगतिवादी समीक्षक और डॉ. रामविलास शर्मा) सहित एमफिल(दिनकर का कुरुक्षेत्र और मानवतावाद),एमए(हिन्दी)और बीए है। ‘नेट’ और ‘स्लेट’ जैसी प्रतियोगी परीक्षाएँ उत्तीर्ण करने के साथ ही अध्यापन(अलीबाग,जिला-रायगढ़ में हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निदेशक और अन्य महाविद्यालयों में भी)का भी अनुभव है। 50 से अधिक शोध-पत्र व आलेख राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। साथ ही ‘देवनागरी विमर्श (उज्जैन),
उपन्यास-‘त्रितय’,ग़ज़ल संग्रह- ‘सैलाब’और प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ और गज़लें भी प्रकाशित हैं। बतौर रचनाकार आप हिन्दी साहित्य सम्मेलन(इलाहाबाद), राजभाषा संघर्ष समिति(नई दिल्ली), भारतीय हिन्दी परिषद(इलाहाबाद) एवं (उ.प्र. मालव नागरी लिपि अनुसंधान केन्द्र(उज्जैन,म.प्र.)आदि से भी जुड़े हुए हैं। कई साहित्यिक कार्यक्रम सफलता से सम्पन्न करा चुके हैं,जिसमें नाट्य रूपान्तरण एवं मंचन के रुप में प्रेमचंद की तीन कहानियों का निर्देशन विशेष है। अन्य गतिविधियों में एनसीसी अधिकारी-पद लेफ्टिनेंट,आल इंडिया परेड कमांड में सम्मानित होना है। इसी सक्रियता के चलते सेना द्वारा प्रशस्तियाँ एवं सम्मान के अलावा कुलाबा गौरव सम्मान,बाबा साहेब आम्बेडकर फैलोशिप दलित साहित्य अकादमी (दिल्ली)से भी सम्मान पाया है। समाजसेवा में अग्रणी डॉ.खान की संप्रति फिलहाल हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निदेशक तथा एनसीसी अधिकारी (अलीबाग)की है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आराधन

Wed Dec 13 , 2017
मन की तुष्टि कर्म किया जो वही कहलाता आराधन, आत्म तुष्टि से कर्म भी कहलाता है बस आराधन। निज कर्तव्य हित करना ही कहलाता है  एक आराधन, इसीलिए तो कण-कण देखा बस करता हुआ आराधन। फूलों की है हँसी आराधन और सरिता गति आराधन, इक-दूजे की देखभाल भी लगती है […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।