क्या रोक पाएगी,
विपरीत प्रकृति भी
उस जरूरतमंद को?
जिसका हौंसला
उसकी जरूरत और,
लक्ष्य रोटी हो।
कहाँ सो पाएगा,
वो ठंड से बचने के लिए
गर्म रजाई में
जब आँगन में
चूल्हा ठंडा हो ?
कैसे लेगा
वो बरसात का आनन्द,
जब रात को
टपकता है टूटा छप्पर ?
कैसे गर्म हवाओं से
बचाएगा अपने को,
जब बिना दवा
तप रहा है बुख़ार में बच्चा,
इस ताप से शायद
गर्म हवाओं का ताप कम होगा ?
कोई विपदा नहीं रोक पाएगी
उसके क़दमों को
आगे बढ़ने से,
अपने लक्ष्य की ओर॥
#तारा प्रजापत ‘प्रीत’
परिचय: तारा प्रजापत ‘प्रीत’ का घर परम्पराओं के खास धनी राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ामें है। आपकी जन्मतिथि-१ जून १९५७ और जन्म-स्थान भी जोधपुर(राज.) ही है। बी.ए. शिक्षित तारा प्रजापत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई है तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। लेखन का उद्देश्य अभी तक तो शौक ही है।
Tue Dec 12 , 2017
नव सृजन करने चली, प्रकृति की अनूठी सौगात उदर में रख नव मास तक सिंचित रक्त से सांसों को, उत्सुक नैना बेचैन धड़कन देखन स्व रचित रचना को मुख देखत पुलकित हर्षाई ममता उमड़ उमड़ कर आई नैनन नीर भरे दर्द सगले बिसराई माँ थी जिसने सुन किलकारी अबोध की […]