उस लड़की को
देखकर,
उम्मीद नहीं बनती
उम्मीदों की याद,
हो जाती है।
वह सुबह से शाम तक
पुराने अशोक के नीचे बैठती,
वह प्रतीक्षा है
बीमार उदारता की,
उस लड़की की।
उस लड़की की क़ोख में
बिस्तर से बच्चे को,
धरा हुआ
बार-बार देखकर
कोई ख़ुशी नहीं होती,
खुशियों के मर मिटने की
याद हो जाती है।
#रुपेश कुमार
परिचय : चैनपुर ज़िला सीवान (बिहार) निवासी रुपेश कुमार भौतिकी में स्नाकोतर हैं। आप डिप्लोमा सहित एडीसीए में प्रतियोगी छात्र एव युवा लेखक के तौर पर सक्रिय हैं। १९९१ में जन्मे रुपेश कुमार पढ़ाई के साथ सहित्य और विज्ञान सम्बन्धी पत्र-पत्रिकाओं में लेखन करते हैं। कुछ संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है।
Sat Dec 2 , 2017
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