पढ़ाई मानव जीवन का आधार है,
सरस्वती माता का प्यारा उपहार है।
शारदे माँ का यह अनुपम सितार है,
गुरू के आशीष से हमारा उद्धार है।
तपस्वी गुरू की दिव्य दृष्टि निहार है,
गुरू,ब्रह्मा,विष्णु,महेश आकार है।
गुरूदेव अद्भुत ज्ञान का भण्डार है,
विनम्रता विद्यार्थी का प्रवेश द्वार है।
परिश्रम से ही सबका बेड़ा पार है,
दिव्य बुद्धि ही ज्ञानामृत आहार है।
सत्य मधुर वचन आदर सत्कार है,
योग्यता से ही जीवन में निखार है।
समय पालन से जीवन में बहार है,
अनुशासनमय जीवन ही संस्कार है।
भविष्य का निर्माण होता साकार है,
यह गुरू का ‘रिखब’ पर उपकार है॥
#रिखबचन्द राँका
परिचय: रिखबचन्द राँका का निवास जयपुर में हरी नगर स्थित न्यू सांगानेर मार्ग पर हैl आप लेखन में कल्पेश` उपनाम लगाते हैंl आपकी जन्मतिथि-१९ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-अजमेर(राजस्थान) हैl एम.ए.(संस्कृत) और बी.एड.(हिन्दी,संस्कृत) तक शिक्षित श्री रांका पेशे से निजी स्कूल (जयपुर) में अध्यापक हैंl आपकी कुछ कविताओं का प्रकाशन हुआ हैl धार्मिक गीत व स्काउट गाइड गीत लेखन भी करते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि और हिन्दी को बढ़ावा देना हैl