हम-तुम

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swpnil
उसने घर पर बात की ,माँ-बाप और छोटी बहन की शुभकामनाएं ली, फिर जल्दी में फोन रख दिया। फिर जल्दी जल्दी एक नम्बर डायल किया,जैसे इस नम्बर से मिलने वाली शुभकामना उसकी सफलता की ग्यारंटी हो। दो घण्टी बजी और फिर उधर से आवाज आई -‘गु$$ड मॉ$रनिंग, क्या हो गया सुबह-सुबह।’
उधर से दागे गए इस प्रश्न को सुन परी अवाक रह गई। आखिर उसका नील इतना गैर जिम्मेदार कैसे हो सकता है। उसने बिना कुछ कहे फोन रख दिया और फोन जमा करने वाले काउंटर की तरफ बढ़ी। आज जीवन में पहली बार वह सिविल सर्विस की परीक्षा में बैठने जा रही थी, पर मूड उतर-सा गया था।
अचानक उसकी नजर दूर खड़े मुस्कुराते एक शख्स पर पड़ी।
उसी शख्स पर जिसे वह नील कहती थी। प्रेम में अक्सर भ्रम हो जाता है,उसे भी हो गया था।
उसने मन को समझाया,लगभग हजार किलोमीटर दूर कोई कैसे आ सकता है। वह फिर आगे बढ़ी ही थी कि, वह शख्स मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ने लगा। वह स्तब्ध खड़ी रही इस कल्पना को जीवंत होता देखकर।
नील उसके पास आया और बोल पड़ा- ‘बेस्ट ऑफ़ लक।’
उसे फिर भी विश्वास नहीं हुआ अपने कानों पर,उसने हाथ आगे बढ़ाया और नील के हाथों को पकड़ने की कोशिश की और ये क्या ………नील ने खुद परी का हाथ थामा तथा एक तरफ भीड़ से अलग लेकर चल दिया। फिर रुका, उसकी तरफ पलटा और उसे गले लगाकर बोल पड़ा -‘बेस्ट ऑफ़ लक पगली।’
बदले में परी ने फुसफुसाते हुए कहा -‘तुम….. यहाँ… इतनी दूर….।’
नील ने बीच में ही बात काट दी -‘दूर कैसे पगली… नीलपरी अलग कैसे हो सकते हैं… परी जहाँ है नील वहीं तो होगा।’
   परी की आँखें सजल हो उठी,बस यही तो सुनना चाहती थी वो… यही उसकी सफलता की ग्यारंटी थी। है ना????
                                        #स्वप्निल(एस.के.श्रीवास्तव)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।