अखण्ड भारत की कल्पना को साकार करती ‘गौतमी पुत्र शतकर्णी’

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 edris
फिल्म समीक्षा
‘गौतमी पुत्र शतकर्णी’ फिल्म अखण्ड भारत की कल्पना को साकार करती तेलगु फ़िल्म है,जो हिन्दी में डब होकर आई है। आप सोच रहे होंगे कि,हॉलीवुड से बॉलीवुड तक पढ़ा जा सकता है लेकिन टॉलीवुड भी,इसकी वजह है इंदौर के कलाकार और शूटिंग लोकेशन महेश्वर होना। इस तेलगु फ़िल्म,जिसे कृष ने निर्देशित किया है,राजा सतकर्णी के जीवन पर आधारित है। यह फ़िल्म बनाने का जोखिम उठाया वाय.राजीव ने। जो लोग नहीं जानते कि,राजा सतकर्णी कौन थे,तो उन्हें इतिहास में लिए चलते हैं।
एक राजा जिसने शक,यमन,पल्हवो से युद्ध किया और अखण्ड भारत की कल्पना को साकार किया। १९०६ में कुछ लेख ओर सिक्के मिले थे,जिसमें राजा सतकर्णी का उल्लेख मिलता है।ऐसा माना जाता है कि ९९  ई.पू. से ४४ ई.पू. तक ५६ साल राज किया और अखण्ड भारत की चन्द्रगुप्त मौर्य, चाणक्य  की अखण्ड भारत की विचार धारा के साथ विदेशी आक्रांताओं से मातृ भूमि की रक्षा की,तथा कई राजाओं को साथ जोड़ा था,फ़िल्म में यही दिखाया भी गया है।
फिल्म में विशेष प्रभाव खूबसूरत बनाए गए हैं। संगीत श्रीदेवी प्रसाद,चिरंतन का है जो ठीक-ठाक है। कलाकारों में बालकृष्ण नन्दमूरी(१०१वीं फ़िल्म)तेलगु के बड़े सितारों में शुमार हैं। उनके एक प्रशंसक ने फ़िल्म का टिकट 1लाख ₹ में खरीदा,वजह यह कि बालकृष्ण इंडो-अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल चलाते हैं,तो उनकी मदद भी हो जाएगी।
फ़िल्म में हेमा मालिनी ने रानी माँ गौतमी का किरदार निर्वाहन किया है तो श्रेया सरन ने पत्नी का किरदार निभाया है।कबीर बेदी ओर त्रेमीडियस ने खलनायकों की भूमिका बखूबी निभाई है। ऐसा माना जाता है कि,मिति सवंत का प्रारम्भ राजा सतकर्णी द्वारा या मालवगण से ही है। ऐसा इतिहास जो हम तक नहीं पहुचा और ऐसा राजा जो सिक्के चलन में लाया हो,ऐसा राजा जिसने अखण्ड भारत की कल्पना को साकार किया हो..यदि इन सवालों के जवाब जानने की जिज्ञासा है तो फ़िल्म अवश्य देखना चाहिए।
फ़िल्म का एक बड़ा भाग इंदौर के पास महेश्वर में शूट हुआ है,जो ३२ दिन तक चला था। इसमें लाइन प्रोडक्शन हर्ष दवे(इंदौर) ने किया है। लगभग ७० कलाकारों को वहां काम मिला था,जो हैदराबाद जाकर फ़िल्म का हिस्सा बने थे। हर्ष का साथ दिया था अंजली, मोहित कुमावत,लकी टांक ने। राजा सतकर्णी फ़िल्म इतिहास के पन्ने पलटती है,इसलिए देखना चाहिए।
                                                                        #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।