
Next Post
परिवर्तन
Fri Jul 28 , 2017
परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है,इसमें ढल जाओ, बदलते परिवेश की जरूरत,हो तो बदल जाओ। कितनी भी लम्बी चाहे, हो रात काली गहरी.. छँट जाएगा अंधेरा, बन सूर्य-से निकल जाओ। पानी की तरह जीवन, है यारों मानो अपना.. कोई हो रंग चाहे, हर रंग में घुल जाओ। आशा है फ़िर […]

पसंदीदा साहित्य
-
December 26, 2022
डॉ एस एन तिवारी स्मृति सम्मान समारोह सम्पन्न
-
January 16, 2018
एहसास
-
December 25, 2017
तुम मुझे यूं भुला न पाओगे…
-
May 27, 2022
हाॅवरिंग
-
April 12, 2019
क्यों सुने
