मेरे धड़ के ऊपर चेहरों का एक विशाल जंगल है

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narendr ary

लोग कहते हैं

मेरे दो चेहरे हैं,

मैं उन्हें निराश करूंगा

मेरे धड़ के ऊपर चेहरों का एक विशाल जंगल है;

वो केवल दो भाषाएँ जानते हैं,

अपनी सीमाओं के अनुसार मुझे मापते हैंl

 

आत्म-वध के आविष्कार से अनभिज्ञ  हूँ मैं,

अस्तित्व के अंतिम-संस्कार करने की कला से अनजानl

 

मुझे अपने सारे चेहरे प्रिय हैं,

वो मेरे भीतर की ज़मीन से उगे हैं;

कभी उन्हें जहरीली हवा आबो-हवा मिली

कभी ख़ूनी बारिश का मानसून,

कभी कोई गिद्ध,हड्डियों की खाद बिछा गया

कभी किसी जंगली फूल के बीज भी,

इन चेहरों को अपने रंग दे गए

वो मेरे भीतर छिपी छिछली नदी

और खूंखार भेड़ियों की मानुष प्रतिकृति हैंl

 

लोग मुझे अपनी सीमाओं के अनुसार पहचानते हैं,

वो मुझे सिर्फ दोमुंहा इंसान मानते हैंl

                                                                                           #डॉ.नरेन्द्र कुमार आर्य

परिचय : डॉ.नरेन्द्रकुमार आर्य का जन्म अगस्त १९७४ में मुरादाबाद(उत्तरप्रदेश) में हुआ हैl आपने उच्च शिक्षा में एम.ए. तथा एमबीए(विपणन),डाक्टरेट किया हुआ हैl आप भारत सरकार के उपक्रम में प्रबंधकीय पद पर कार्यरत हैंl लेखन की बात करें तो,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं एवं अकादमिक जर्नल्स में हिन्दी  व अंग्रेजी में लेख व कविताएं प्रकाशित हैंl साथ ही कुछ बड़ी प्रतिष्ठित काव्य पत्रिकाओं में भी कविताएँ छापी हैंl एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका द्वारा आपको सम्मान के लिए २०१४ में  नामांकित किया गया थाl पटना विश्वविद्यालय स्थित कृष्णा घाट के समीप आपका निवास हैl 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।