
Next Post
आजाद परिन्दे
Wed Jun 21 , 2017
‘थानेदार साहब’ सेवानिवृत्ति पाते ही इन्सान बन गए। ‘नेता जी’ चुनाव जीतते ही हेवान बन गए। ‘शासकीय चिकित्सक’ ड्यूटी समाप्त होते ही दुकान चलाने लगे। जनतंत्र के वृक्ष पर बैठकर परिन्दे आजादी मनाने लगे ॥ […]

पसंदीदा साहित्य
-
December 22, 2017
कलम सियासत नहीं लिखेगी
-
October 29, 2020
खुद पे भरोसा रखना
-
July 17, 2017
पितृमोक्ष अमावस्या
-
February 26, 2018
भैयाजी
