गणतंत्र दिवस विशेष- प्यारा गणतंत्र हमारा

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आज़ाद तो देश को कर गए
पर दुश्मन, जाते-जाते भी
समस्याओं का पुलिंदा थमा गए
बँटा हुआ था देश हमारा
कोई न था किसी का सहारा
छः सौ से भी ज़्यादा थीं रियासतें
सांप्रदायिकता की थी बड़ी ताकतें
लौह पुरुष पटेल ने ज़िम्मा उठाया
अनेकता में एकता को दर्शाया
फैली थी रियासतें यत्र-तत्र-सर्वत्र
अपने प्रयासों से कर दिया सबको एकत्र
दूरदर्शिता से एक अखंड भारत ले आए
आओ, इसे फिर सोने की चिड़िया बनाएँ
प्रभुता संपन्न बन गया मेरा देश
कोई नहीं दे सकता अब हमें आदेश
धार्मिक सहिष्णुता को अपनाकर
बन गया सब धर्मों का रखवाला
माने कोई भी धर्म अब देशवासी
धर्म और राजनीति को अलग कर डाला
महानायकों के प्रयासों से बना मंत्र
हिंदुस्तान एक प्यारा-सा गणतंत्र
बन गया जन-जन के मन का तंत्र
अधिकारों के साथ कर्त्तव्य भी मिले
विकास के सबको समान अवसर मिले
नागरिक ख़ुद अपनी सरकार चुनें
इसीलिए कहलाया यह प्रजातंत्र
यह सब होने के बाद अब मेरा देश कहलाता
सर्वप्रभुता संपन्न, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणतंत्र।

#उषा गुप्ता
इन्दौर, मध्यप्रदेश

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गणतंत्र दिवस विशेष- आओ गणतन्त्र दिवस मनाएँ

Mon Jan 23 , 2023
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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।