नारी काली है

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aarti jain
एक नारी दूसरी नारी को
समझेगी
तब सम्मान की बगिया
खिलेगी
खुशी से निभाओं अपने हर
  फर्ज
आँसू का सूत समेत चुकाना
कर्ज
मानती हु हर रिश्ता है तुम्हारी
जान
पर मत भूलना प्यार से बड़ा है
मान
बेशक आएगा तुम्हारे ख्वाब में एक
नवाब
पर तुमसे खेले तो देना सही वक्त पर सही
जवाब
नारी तुम कली नहीं हो साक्षात हो एक
काली
तुम फूल नहीं जिसका बन जाए कोई अंजान
माली
अगर जीवन साथी बनकर नहीं रहे
पावन
उसे वही एहसास दिलाना जब आये नया
सावन
क्यूँ कहता है नारी को पुरुष एक
पतन
नारी से अनमोल नहीं होता है कोई
रतन
अपने अस्तित्व की नारी कर तू असली
पहचान
कब तक अपनी शक्ति से रहेगी तू
अनजान
आज ना नारी बड़ी है ना पुरुष
बड़ा है
संसार का चक्र पुरूष और नारी दोनों पर
खड़ा है
नारी सीख ले तू करना अपना सही से
मान
तब पुरुष सीखेगा अपनी गलती पर पकड़ना
कान
तब दूंगी में महिला दिवस की दिल से
शुभकामना
जब नारी की नारी से मित्रता की पूरी होगी
मनोकामना
#आरती जैन
परिचय:  आरती जैन राजस्थान राज्य के डूंगरपुर में रहती है। आपने अंग्रेजी साहित्य में एमए और बीएड भी किया हुआ है। लेखन का उद्देश्य सामाजिक बुराई दूर करना है।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।