तेरे शहर से चुपचाप
कहाँ जाऊंगा,
बारिशें होंगी
तूफान भी आएंगे
पेड़,पौधों को सही,
याद बहुत आऊंगा।
मैं अकेला चला,
भीड़ में
भीड़ में किसे पाऊंगा,
नया जहां,नई जगह
नई भोर में बनाऊंगा।
तेरे शहर को,
तेरे भरोसे छोड़
मैं चला जाऊंगा,
लौटकर जल्दी
इत्मिनान रख
वापस यंही आऊंगा।
गीत नए गाऊंगा,
मंजिल नई पाऊंगा..
ये शहर छोड़ जाऊंगा॥
#अरुण कुमार जैन
परिचय: सरकारी अधिकारी भी अच्छे रचनाकार होते हैं,यह बात
अरुण कुमार जैन के लिए सही है।इंदौर में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में लम्बे समय से कार्यरत श्री जैन कई कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर चुके हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त सहायक आयुक्त श्री जैन का निवास इंदौर में ही है।
Sat Jun 10 , 2017
मैंने गेहूँ के संग घुन पिसते देखा है, सियासत में लाचार किसान को मरते देखा है। सीमा विवाद में वीर जवान को मरते देखा है। मजहबी जंग में इंसानियत को मरते देखा है। जालिमों के बीच भोली जनता को फंसते देखा है। आज न कहेंगे हम कौन दोषी हैं, कौन […]