जो सहज हो गया वही राम- गौरव साक्षी

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कुक्षी में शताब्दी वर्ष निमित्त काव्य उत्सव सम्पन्न

छिड़ गया हो युद्ध तम से अगर, एक दीपक जला दो – गुरुजी

कुक्षी। हिन्दी की दिग्विजय यात्रा में कवि सम्मेलन के शताब्दी वर्ष निमित्त मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा स्थानीय शारदा मंदिर वाचनालय, कुक्षी में काव्य उत्सव का आयोजन गुरुवार को रात्रि 8 बजे रखा, जिसमें विशिष्ट आतिथ्य वरिष्ठ साहित्यकार के.सी. शर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा रमेश धाड़ीवाल, समाजसेवी रामनारायण मोदी, इन्दौर से सुप्रसिद्ध गीतकार कवि गौरव साक्षी व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ उपस्थित रहे। उत्सव प्रभारी माजिद शेख व कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि एवं शिक्षाविद् मनोज साधु ने किया।

सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर उत्सव की शुरुआत की गई, तत्पश्चात संस्थान द्वारा देवेंद्र जैन, आशीष परसाई, रविन्द्र जैन, माजिद शेख द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया एवं स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
काव्य उत्सव में नगर कुक्षी के नवोदित कवि नीलेश मोदी के कविता संग्रह ‘आशा ही विश्वास’ का विमोचन भी किया गया।

उत्सव में कुक्षी के कविकुल परम्परा में भँवर सिंह परिहार, गोपाल सोनी व दीपक शर्मा ने काव्य पाठ किया, जिसमें श्री सोनी ने हिन्दी कविता के मूल्य पर काव्य पाठ किया और श्री शर्मा ने निमाड़ी कविताओं से समा बाँधा। उत्सव मूर्ति व चर्चित गीतकार गौरव साक्षी ने नर्मदा के किनारे के मुक्तक से अपनी बात शुरू करते हुए अयोध्या को पाँचवा धाम बताया, फिर राम की सहजता पर गीत पढ़कर काव्य उत्सव को राममय कर दिया।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने अपने वक्तव्य में काव्य उत्सव में हिन्दी की महनीय वाचिक परम्परा का शताब्दी वर्ष के बारे में चर्चा करते हुए सभी को हिन्दी में हस्ताक्षर करने का प्रण दिलवाया।

तदुपरान्त वरिष्ठ राजनेता व भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश धाड़ीवाल ने कविता के कुक्षी संस्कार का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘बाल्य काल से अर्पण के संस्कार उसे हिन्दी के लिए आगे तत्पर रख रहे हैं, गाँव-गाँव में इस तरह के आयोजन हिन्दी के विस्तार का कारण बनेंगे।’

अतिथि रामनारायण मोदी ने कहा कि ‘आज वृद्धाश्रम जैसी व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए हिन्दी अनिवार्य हो।’

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कैलाश शर्मा गुरुजी ने हिन्दी के महत्त्व को समझाते हुए आशावान रहने की बात कही, तत्पश्चात उन्होंने अपना गीत ‘छिड़ गया हो युद्ध तम से अगर, एक दीपक जला दो’ पढ़ा।

ज्ञात हो कि मातृभाषा उन्नयन संस्थान देशभर में हिन्दी प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत है और इस वर्ष हिन्दी कवि सम्मेलन का शताब्दी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उसी तारतम्य में देशभर में काव्य उत्सवों का आयोजन संस्थान द्वारा किया जाएगा। प्रथम काव्य उत्सव का आयोजन कुक्षी में हुआ।

इस उत्सव में मनोहर मंडलोई, रविन्द्र जैन, भूपेंद्र वर्मा, सुरेश जैन, कुक्षी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र जैन, आशीष परसाई सहित यतीन्द्र डूंगरवाल, राहुल वर्मा, रवि मोदी, मनीष पाटीदार, आदि नगर के बौद्धिक व साहित्यिक जनों के साथ-साथ पत्रकारिता जगत के साथियों की उपस्थिति रही।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।