भीड़ असहाय थी।

भीड़ असहाय थी
सहमा सहमा,
खोया खोया
मेरी आँखों में ख़ून का ज़हर था
और दिल में नींद थी
वह असहाय कपड़ों के तार उठा रहा था
एक निरंतर मजबूरी द्वारा शब्द
और शब्द का अर्थ बदल दिया गया था
आश्चर्यजनक रूप से, दिन
और रात गुलशन लगभग तेरह रात थे
वे भयावहता के मार्ग में कांप रहे थे
और कोहरे के कारण जाति की
छवि गायब हो रही थी
पक्षी घोड़े के इहराम में प्रार्थना कर रहे थे
पिछले कुछ समय से फूलों का मौसम इच्छा की शाखा पर रहा है
कोई दस्तक नहीं थी
ऐसा जुल्म का मकड़जाल था
यह कि शाखाएँ नृत्य के प्रति अनिच्छुक थीं
बंजर हाथ जो दिलों में डर की फसल उगाते हैं
फिर दूसरे पक्ष को कलियों के रक्त से भिगोया जाएगा
की तैयारी में शामिल थे
अचानक फूल का मौसम
उसने जेल का दरवाजा खटखटाया
हवा ने कपड़े बदल दिए
पेड़ों पर फूलों ने गुलाबी छंद लिखे
बदलते दृश्यों के आकर्षण में सपना
व्याख्याओं के चंगुल से मुक्त
बस एक अक्षर की मिठास ने मुझे इस तरह चकित कर दिया
कि कविता रंग और गंध बदलती है
पक्षियों की उड़ान में, शिकारी अभी भी खतरे में है
नए सीज़न ने पलकों पर वादों की एक सुनहरी गठरी डाल दी है
कि हम आशा के एक मौसम हैं
बारिश में स्नान करेंगे
नए सूरज उगेंगे
हम एक नई पृथ्वी बनाएंगे

खान मनजीत भावडि़या मजीद

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।