व्यंग्य संग्रह ‘पाण्डेय जी छज्जे पर’ का विमोचन व खामोशियों की गूँज पर चर्चा रविवार को

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पुस्तक विमोचन एवं चर्चा आयोजित

इन्दौर । संस्मय प्रकाशन द्वारा रविवार को लालित्य ललित के व्यंग्य संग्रह *पाण्डेय जी छज्जे पर’ का विमोचन एवं लेखिका अदिति सिंह की पुस्तक खामोशियों की गूँज पर चर्चा का आयोजन प्रेस क्लब सभागार में अपराह्न चार बजे किया जाएगा। इस आयोजन में विशिष्ट अतिथि व्यंग्य यात्रा के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, लोकसभा सचिवालय के संपादक रणविजय राव व नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक डॉ. लालित्य ललित रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन मनीषा व्यास करेंगी।

संस्मय प्रकाशन की संस्थापक शिखा जैन ने बताया कि ‘व्यंग्य संग्रह ‘पाण्डेय जी छज्जे पर’ में लेखक डॉ. लालित्य ललित के चुनिंदा व्यंग्य सम्मिलित हैं। जो राजनीति और सामाजिक व्यवस्थाओं पर प्रहार करते हैं।’

लेखिका अदिति सिंह ने कहा कि ‘उनकी पुस्तक में प्रेम, वात्सल्य, करुण रस की कविताओं का संग्रह है।’

अदिति सिंह की पुस्तक खामोशियों की गूँज पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गरिमा दुबे व सुषमा व्यास राजनिधि चर्चा करेंगे।

आयोजन में शिक्षाविद डॉ. संजीव कुमार व ख्यात लेखक राजेश कुमार को भी सम्मानित किया जाएगा। पुस्तक विमोचन व चर्चा में शहर के सुधि साहित्यिकजनों सहित गणमान्य नागरिक सम्मिलित होंगे।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।