हिन्दी के गौरव का यज्ञ है समारोह- श्री सिलावट

0 0
Read Time6 Minute, 57 Second

हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह सम्पन्न

हिन्दी में हस्ताक्षर करना गर्व का कार्य- डॉ. वैदिक

हिन्दी का गौरव यज्ञ है अलंकरण

इंदौर। इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित आज हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं विचारक श्री कृष्णकुमार अष्ठाना एवं वरिष्ठ कथाकार व लेखिका डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री को मातृभाषा उन्नयन संस्थान की ओर से हिंदी गौरव अलंकरण से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक एवं प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी थे।

अतिथि स्वागत श्रीमती शिखा जैन, डॉ. नीना जोशी, अदिति सिंह भदौरिया, नितेश गुप्ता, शीतल रॉय, अरविंद जोशी, नितेश उपाध्याय, रोहित त्रिवेदी, ऋतु गुप्ता, जलज व्यास व डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया।
अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के उपरांत संस्थान द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। शब्द स्वागत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया। तदुपरांत संस्थान द्वारा कवियों में गीतकार अमित जैन ‘मौलिक’ (जबलपुर), गीतकार धर्मेंद्र सोलंकी (भोपाल), कवि राम भदावर (इटावा), पंकज पंडित (ललितपुर) व अमित शुक्ला को काव्य गौरव अलंकरण एवं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सम्मानित बाल साहित्यकार अवि शर्मा को बाल साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री तिवारी ने कहा कि ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान की इससे बड़ी और क्या उपलब्धि होगी, जिसमें 20 लाख लोगों के हस्ताक्षर हिंदी में कराए गए और हिंदी प्रेमियों व विद्वानों को मंच पर बुलाकर सम्मानित कर रहा है।’
मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि ‘मध्यप्रदेश सरकार मैडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई राष्ट्रभाषा हिंदी में कराएगी और इसकी शुरुआत हो गई है और अभी देशभर के हिंदी विद्वान, भाषाविद व विषय विशेषज्ञ हिंदी भाषा में पुस्तकें लिख रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘इंदौर कला, शिक्षा, संस्कृति, आस्था, विश्वास और स्वच्छता की नगरी है। यहाँ से कोई आह्वान करता है, उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है।’ कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार और वर्षों से हिंदी के लिए कार्यरत डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने कहा कि ‘हम अपने हस्ताक्षर मातृभाषा हिंदी में करें। हिंदी हमारी राज भाषा है लेकिन आज वह नौकरानी और अंग्रेज़ी महारानी बनी हुई है, जो काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार हिंदी के गौरव को बढ़ाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है, जो शुभ संकेत है।’ डॉ. वैदिक ने मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा हिंदी में हस्ताक्षर कराए जाने वाले अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।’

अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में श्री अष्ठाना ने कहा कि ‘दुनिया के 134 देशों में हिंदी बोली जा रही या उस पर कुछ न कुछ कार्य हो रहा है, हम चाहें तो अपनी दिनचर्या से गुड मॉर्निंग, बाय बाय, ओके, गुड इवनिंग, वॉटर जैसे अंग्रेज़ी शब्दों और उद्बोधनों को निकाल सकते हैं, इसकी शुरुआत बच्चों के साथ की जानी चाहिए।’

अपने सम्मान के प्रतिउत्तर में वरिष्ठ कथाकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री ने कहा कि ‘राजभाषा हिंदी में वह ताकत है जो कम और छोटे शब्दों में अपनी बात कहने की क्षमता रखती है, यह विशेषता अन्य किसी भाषा में नहीं है। एक लेखक की सबसे बड़ी पूंजी उसका पाठक वर्ग होता है, अतः जीवन में पठनीयता का होना आवश्यक है। आज लेखिकाएँ अपनी आत्मकथा लिखकर साहस का परिचय दे रही हैं। दुर्भाग्य है कि हमारी भाषा में अश्लीलता के शब्द बढ़ रहे हैं, जो स्वादिष्ट भोजन में कंकर के समान हैं।’

इस मौके पर हिंदी की सेवा करने वाले मुकेश तिवारी, प्रवीण निखरा, आशा प्रेम माथुर, श्रीमन्नारायण चारी विराट, चंचल सोनी को हिंदी योद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अंशुल व्यास ने किया व आभार अमित जैन मौलिक ने माना।


कार्यक्रम में सतीश राठी, अश्विनी दुबे,यशोधरा भटनागर, माधुरी व्यास, पंकज शर्मा, ऋतु साहू, गौरव साक्षी, प्रेस क्लब उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी, कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, प्रवीण जोशी, लक्ष्मीकांत पंडित, राजेन्द्र कोपरगाँवकर, अर्देन्दु भूषण, जलज व्यास, विघ्नेश् दवे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

श्री कृष्ण कुमार अष्ठाना जी को हिन्दी गौरव अलंकरण से अलंकृत किया
श्री कृष्णा अग्निहोत्री जी को हिन्दी गौरव अलंकरण से अलंकृत किया

matruadmin

Next Post

पुस्तक समीक्षा: 'समय अभी तक वहीं खड़ा है...'

Thu Mar 3 , 2022
चार दिन जिंदगी है सुना था मगर तीसरा दिन गया है बिना बात के… जब कोई ऐसा काम करना पड़े जिसका मन न हो तो आँखे खिड़की के बाहर कहानियाँ तलाशती हैं। एक ऐसे ही दिन खिड़की के बाहर मैंने देखा गुलमोहर का पेड़ और 3 घंटे तक कल्पेश जी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।