मातृभाषा ने किया रिक्शा चालकों को कोरोना सुरक्षा कवच किट वितरित

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इन्दौर । 

कोरोना की आपदा के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान के सेवा सर्वोपरि प्रकल्प द्वारा स्थानीय ऑटो रिक्शा चालकों को कोरोना सुरक्षा कवच किट वितरीत किए गए।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘संस्थान द्वारा विगत एक माह से लगातार शहर में राशन, भोजन और पानी का वितरण किया जा रहा है, इसी कड़ी में कोरोना योद्धाओं के तौर पर कार्यरत ऑटो रिक्शा चालकों और उसमें बैठने वाले आम लोगों की भी सुरक्षा के लिए कार्य करना हमारा ध्येय है।’ इसी के मद्देनज़र प्रकल्प के माध्यम से संस्थान के इरशाद खान सहित दल द्वारा शहर के कई चौराहों पर ऑटो रिक्शा चालकों को कोरोना सुरक्षा कवच किट उपलब्ध करवाए गए।सेवादूतों द्वारा सुरक्षा कवच किट वितरण किया गया। रिक्शा चालकों ने संस्थान के कार्यों की सराहना की एवं प्रकल्प का धन्यवाद दिया।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।