कर भरोसा

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तू निराश क्यों खड़ा है?
किस दुविधा में पड़ा है?
कर खुद पे तू भरोसा।
प्रभु सँग तेरे खड़ा है।

यूँ ही नहीं है मिलती,
जग में कोई सफलता।
तन मन और लगन से,
है कर्म करना पड़ता।
तू निराश……..

बेचारा नहीं तू बन्दे,
ईश्वर की तू है रचना।
एक बार मिलता जीवन,
ना व्यर्थ इसको करना।
तू निराश……..

आगे बढ़ा कदम तू,
मन्जिल तेरी पुकारे।
तू क्यों चुप है बैठा?
यूँ मन को अपने मारे।
तू निराश……..

पी कर विष का प्याला,
नीलकंठ वो कहाए।
चिंता,भय,फिकर में,
आँसू तू क्यों बहाए?
तू निराश……..

माना कठिन हैं राहें,
पर हौंसले जवां रख।
विस्वास की पूंजी,
दिल में तू सदा रख।
तू निराश……..

चल उठ खड़ा तू हो जा,
समय अब ना तुम गंवाओ।
साहस,धैर्य ,लगन से,
कुछ जग को कर दिखाओ।
तू निराश……..

स्वरचित
सपना (सo अo)
जनपद-औरैया

matruadmin

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झांसी दतिया व ललितपुर पर एक कुंडली

Tue Jun 22 , 2021
झांसी गले की फांसी,दतिया गले का हार, ललितपुर न छोड़िए,जब तक मिले उधार। जब तक मिले उधार,ललितपुर कभी न छोड़े, चाहे कितने कष्ट मिले,लगते रहे तुमको कोड़े। कह रस्तोगी कविराय,सुनो भई ललितपुर वासी, ललितपुर न छोड़ना, बनेगा एक दिन ये झांसी।। आर के रस्तोगी गुरुग्राम Post Views: 397

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।