लेखक के गांव की पाती…

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जनपद आगरा के गांव रिहावली में पुनः जनजीवन सामान्य होने लगा है । आपको बता दें कि बीती पन्द्रह अप्रैल की तारीख को यहां चुनाव के दौरान भीषण दंगा हुआ था । दंगों के दौरान ही कुछ असामाजिक तत्वों ने प्राथमिक विद्यालय के कमरे की दीवार- जंगला तोड़ कर मतपेटिकायें लूट लीं थीं ।और मतपेटिकायें उसी रात पुलिस ने बरामद कर ली थीं , उसके बाद पुलिस ने गांव के ही करीब पैंतीस स्त्री -पुरुषों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया । बताया जा रहा है कि औरतों के साथ दूध पीते मासूम बच्चे भी सलाखों के पीछे चले गये हैं । पन्द्रह तारीख के बाद गांव में पुलिस की दहशत इतनी फैली कि पूरा गांव खाली हो गया था । इक्कीस अप्रैल तक गांव में चंद बुजुर्ग ही नजर आते थे, वो भी डरे हुए । इक्कीस को पुनः मतदान हुआ, उसके बाद लोगों के दिमाग से पुलिस की दहशत कम हुई ।

हालांकि अधिकांश ग्रामीणों के अंदर पुलिस का खौफ अभी भी बरकरार है । जैसे ही पुलिस से मिलता -जुलता सायरन गांव वाले सुनते हैं तो जंगलों की ओर दौड़ पड़ते हैं।

दुखद बात यह रही कि जनता के प्रतिनिधि विधायक सांसद चाहे वे पूर्व हो या वर्तमान स्थिती का जायजा लेने गांव में एक बार भी नहीं आये । जो चुनाव के समय घर-घर वोटों के लिए गिडगिडाते हैं । वे इस घटना को अनदेखा करके चुप्पी साध गये । इसका कारण आचार संहिता लागू होना कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया । लेकिन इस चुप्पी के कारण निर्दोष ग्रामीणों को भयंकर समस्याओं का सामना करना पड़ा ।

समाचार लिखने तक दोनों प्रत्याशी जेल में बंद हैं । और इनके साथ अन्य ग्रामीण भी बंद हैं, जिनमें औरतें व मासूम बच्चे भी शामिल हैं । प्रधान पद चुनाव का परिणाम भी घोषित हो गया है । मलखान सिंह जो लगातार तीन बार पत्नी सहित प्रधानी जीतते आ रहे थे, वो इस बार चुनाव हार गये हैं और लायक सिंह को ग्रामीणों ने अपना मुखिया चुना है । दु:खद बात यह है कि इस समय दोनों ही प्रत्याशी जेल में बंद हैं ।

गांव रिहावली वही गांव है जहॉं युवा साहित्यकार एवं स्वतंत्र पत्रकार मुकेश कुमार ऋषि वर्मा रहते हैं । ऋषि वर्मा अनवरत देश ही नहीं विदेशों में भी छपते हैं, जिनमें प्रमुख देश हैं अमेरिका, कनाडा, चीन, नेपाल । इनके तीन काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और पत्रिका – युवा धड़कन के प्रधान संपादक हैं । एक सहयोगी संकलन कालेश्वर ज्योति इनके द्वारा प्रकाशित हो चुका है, इसके साथ ही कालिका दर्शन सहयोगी संकलन प्रेस में जाने के लिए तैयार है । इन्हें अब तक साहित्य एवं कला के क्षेत्र में करीब 200 से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार देशभर से प्राप्त हो चुके हैं । बेहद दुःख का विषय है कि आज मुकेश कुमार ऋषि वर्मा के गांव रिहावली का नाम काफी बदनाम हो चुका है । सरकारी महकमा गांव का नाम सुनते ही बिदक जाता है और अजीब नजरों से देखना शुरू कर देता है । कहते हैं एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है । आज यही मुहावरा गांव रिहावली में चरितार्थ हो रहा है ।
सभी सम्मानित ग्रामीणजनों से आत्मिक अनुरोध है कि आपसी मनमुटाव को भूल कर आपस में मिलजुल कर रहें । चार- छ: लोगों को छोड़कर पूरा गांव महा बेरोजगार है । पालतू पशुओं से व बाहर मेहनत- मजदूरी करके ही सभी परिवार पाल रहे हैं । खेतीबाड़ी भी किसी के पास कुछ खास नहीं है । पड़ोसी गांवों में मजदूरी करके गुजारा कर रहे हैं तो कोर्ट कचहरी, पुलिस -वकील का लफड़ा क्यों मौल ले रहे हैं । क्यों अपने बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैं ।

प्रशासन से अनुरोध है कि देश में कोरोनावायरस बहुत बुरी तरह से फैल गया है । महंगाई डायन आमजन को तिल-तिल मार रही है । भटके हुए व अशिक्षित लोगों को समझाएं न कि मुकदमों की चक्की में पीसें । अगर समय रहते गांव वालों को सही रास्ता दिखाने वाला कोई राजनैतिक नेता या फिर पुलिस प्रशासन का अधिकारी मिल जाए तो गांव रिहावली के लोग भी देश के विकास व राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दे सकते हैं । क्योंकि मैंने देखा है, गांव के लोग नेताओं व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को बड़ी इज्जत देते हैं और उनकी हर बात मानते हैं ।

आशा करते हैं प्रशासन गांव रिहावली की ओर कुछ विशेष ध्यान देगा और असामाजिक तत्वों पर अपनी कड़ी नजर रख कर गांव में शांति व्यवस्था कायम करायेगा । वहीं नवनिर्वाचित प्रधान लायक सिंह जी से भी आत्मिक अनुरोध है कि बगैर किसी भेदभाव के संपूर्ण गांव में समान विकास करें । पात्र व्यक्ति चाहे वह किसी भी गुट का रहा हो उसके हिस्से का विकास उस तक अवश्य पहुंचायें एवं अपने विरोधियों को नजरअंदाज करके सिर्फ गांव के विकास पर ही ध्यान केंद्रित रखें ।

उम्मीद है, जल्द प्रशासन जेल में बंद प्रधान प्रत्याशियों सहित ग्रामीणजनों को कठोर चेतावनी के साथ मुक्त कर देगा, ताकि पुनः गांव में खुशहाली लौट आये… ।

  • मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।