महंगाई की मार,लोग है लाचार,कब सुनेगी सरकार?

Read Time0Seconds

खुदरा बाजार में मँहगाई तो हमेशा से दिखती रही है लेकिन विवशता तो तब सामने आई जब थोक मँहगाई दर पिछले सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए थोक कीमतो पर आधारित मुद्रास्फीति 7•39 प्रतिशत हो गयी है।मँहगाई की यह ऊँची रफ्तार आम लोगो पर भारी है। फरवरी में यह केवल 4•17 ही थी।2012 में भी थोक मँहगाई 7•4 प्रतिशत हो गयी थी जिसका गुस्सा मौजूदा सरकार को भुगतना पडा था।

तेल की कीमतों में वेतहाशा वृद्धि का असर थोक मँहगाई पर पडना तो फिक्स था ।मार्च में ईंधन और बिजली की मुद्रा स्फीति 10•25 प्रतिशत रही जो फरवरी में केवल 0•58 प्रतिशत थी।

मंहगाई दर पर रोक लगाने के लिए सरकार को तेल ईंधन कम्पनिया को नियंत्रण में रखकर कीमत स्थिर रखना चाहिए।देश इस वक्त नाजुक दौर से गुजर रहा है सरकार के स्तर पर फल,सब्जीयां, दूध और जरूरत के सभी समानों को सस्ते कीमतों पर मुहैया कराने की नीति पर काम करना चाहिए ताकि भंडारण और मुनाफाखोरी पर लगाम लगे और सरकार से डायरेक्ट लोग खरीद सके इससे एक अलग बदलाव लाया जा सकता है और उच्च मँहगाई दर पर काबू पाया जा सकता है।

पंचायत स्तर पर जरूरत के सभी सामानों के लिए एक सरकारी दूकान होना अनिवार्य है जहां रोजमर्रा की सभी सामान सरकारी कीमत पर मिल सके और भारत के ग्रामीण इन सेठ साहुकारो की चुंगल से आजाद हो सके। कोरोना काल में मँहगाई की दर को झेल पाना यहाँ के लोगो के लिए कतई आसान नहीं है।

वैसे हमारे यहां जनवितरण प्रणाली की व्यवस्था तो जरूर है लेकिन यह एक पुराना और लंबी प्रक्रिया है। इसमे बहुत सारे लोग वंचित रह जाते है और सामान की भी सीमित मात्रा होती है।बदलते वक्त के साथ जन वितरण प्रणाली की दूकानों को आधुनिक कर उसमें सारी सामान की व्यवस्था की जाय, साथ ही कोई भी उस दूकान से अपना आधार अथवा पैन कार्ड दिखाकर सामान ले सके ऐसी व्यवस्था की जाय ।

इस कोरोना अवधि ने देश से पूरे दो वर्ष ले लिए हैं।लोग आशंकित हैं।चारो ओर हाहाकार है नौजवान की पढाई हो आना-जाना, खाना-पीना बहुत सारी दिक्कतें हैं, जबकि मुनाफाखोर अपनी रासलीला में मग्न है और सरकारें विधवा विलाप करती नजर आ रही है।ऐसे में मै देश के सभी माननीयों/माननीया से विनम्रता पूर्वक अपनी लेखनी के माध्यम से अपील करना चाहता हूँ कि ऐसी समस्याओं को पूरजोर तरीके से देश के संसद में रखें और समाधान के मार्ग की ओर बढ़े क्योंकि अब ज्यादा समय नहीं है हाहाकार मचने में ?

आशुतोष
पटना बिहार

0 0

matruadmin

Next Post

मां दुर्गा से प्रार्थना

Sat Apr 17 , 2021
नव दीप जले,नव पुष्प खिले, नित्य मां का आशीर्वाद मिले। कभी ना हो दुखो का सामना, उसका सैदेव आशीर्वाद मिले।। करता हूं प्रार्थना मां दुर्गा से, तुमको सुखो का भंडार मिले। किसी को कोई कष्ट न हो जरा, सबको हर तरह का सम्मान मिले। घर घर में हर तरह खुशहाली […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।