प्यार

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जब मिले किसी से नजरे
जब मिले किसी से दिल।
समझो की प्यार तुम्हें
अब होने लगा है।।

जिंदगी की दास्तान
चाहे कितनी हो हसीन।
बिन तुम्हारे कुछ नहीं
बिन तुम्हारे कुछ नहीं।
एक साथ की जरूरत
हर किसी को होती है।
है अगर वो नर तो
चाहिए एक मादा उसे।
ये ही प्रकृति का है नियम
नर और मादा का हो संगम।
इसी तरह से संसार चले
इसी तरह से संसार चले।।
जब मिले किसी से नजरे
जब मिले किसी से दिल ..।।

है अगर मोहब्बत किसी से
तो इसका इजहार करो।
अपने दिलकी भावनाएं
सामने वाली से कहो।
होगा उसको भी प्यार
तो वो करेगी इकरार।
और मुस्कराकर के
देगी तुमको वो उपहार।
ऐसे ही होती है प्यार
मोहब्बत की शुरुआत।
जिसको मिलती है ये
जीवन खिल जाता उसका।।
जब मिले किसी से नजरे
जब मिले किसी से दिल।
समझो की प्यार तुम्हें
अब होने लगा है।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन, मुंबई

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।