
चिरनिंद्रा में सोई दादी
राख अंगार हुई दादी
सोने मानिद तपकर
ओर निखर गई दादी
देह से तो परे रहती थी
शिव संग वह रहती थी
देह रूप में जली दादी
आत्म रूप में जीवित दादी
देखो वह शिव बाबा संग है
चेहरे पर मुस्कान गज़ब है
फ़रिश्ता बन सब देख रही
देह का क्रियाकर्म दादी
ह्र्दयमोहिनी दादी सुन लो
यह फरियाद हमारी सुन लो
यज्ञ का अधूरा काम पड़ा है
आकर इसको पूरा कर लो।
#श्रीगोपाल नारसन

