नसीब अपना अपना

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बड़े नसीब वाले होते है
जिन्हें प्रभु दर्शन मिलते है।
कुछ तो उसमें भी
विशेष होते है।
जिन्हें खुद प्रभु बुलाते है
और भक्ति का मौका देते है।
पर कुछ वदनसीब होते है
जिन्हें बुलवा भी होता है।
पर दरवाजे पर होते हुए भी
उनका दर्शन नहीं मिल पाता।
यही तो उस भाग्यविधाता का
बहुत बड़ा खेल होता है।
जो हर किसीको समझ नहीं आता है।
मिलता उसे ही प्रसाद
जो प्रभुकी नजरो में आता है।
और प्रभु की दया दृष्टि से
उसका बेड़ा पार हो जाता है।
वैसे तो सभी प्रभु के वंदे होते है।
इसलिए सभी के दिलो में प्रभु वस्ते है।
पर कुछ तो अलग होते है
जो प्रभु के साथ चलते है।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

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