बेटियाँ आँखों का नूर,

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बेटियाँ आँखों का नूर हैं, देश का कोहिनूर हैं

बेटी को नहीं हम अब यूँ ठुकराते हैं
बेटी का होना अब नहीं दुर्भाग्य मानते हैं
बेटी दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती बन आती है
बेटी घर में अमन चैन सुख शान्ति लाती है

बेटियाँ आँखों का नूर हैं, देश का कोहिनूर हैं

आओ मिल करें कलिकाओं का स्वागत
जिनकी महक से अँगना होता सुवासित
क्यारियाँ ख़ुशियों के फूलों से लद जाती हैं
चिड़ियों सी लगें चहकनें फुदकतीं नाचती हैं

बेटियाँ आँखों का नूर हैं, देश का कोहिनूर हैं

वृद्धावस्था की बनी सौगात मन को लुभातीं
नहीं माँगतीं हक़ अधिकार, सर्वस्व लुटातीं
सौभाग्यशाली घर जहाँ बेटियाँ जन्म लेतीं
दोनों ही परिवारों को ये खुशहाल बनातीं

बेटियाँ क्या हैं, ये आँखों का चमकता नूर हैं
मानो ना मानो देश का अनमोल कोहिनूर हैं
देश पर पड़ी जब भी विपदा लड़ीं बन मर्दानी
बेटियों की वंशज लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी

प्रो.नीलू गुप्ता विद्यालंकार
कैलिफ़ोर्निया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।