
सरेआम देखो गबन कर रहें हैं
सबूतों को यारों दफन कर रहे हैं
बड़े आदमी हैं फितरत है उनकी
गज़ब के हुनरमंद फन कर रहें हैं
चरस गांजा दारू कोकीन के शौकीन
न जाने वो क्या क्या चलन कर रहें हैं
मर्यादा हैं ना ,ना सम्मान किसी का
नंगा वो अपना बदन कर रहें हैं
परवाह रिश्तों की हरगिज़ नहीं हैं
खुद में ही खुद को मगन कर रहें हैं
#किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट

