फिल्मी सितारे का अस्त होना

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जाते जाते कुछ कह गए सुशांत,
सुशांत होकर करा अपने को शान्त।
था तनाव में करी क्यो खुद कशी,
मन में नहीं थी शायद कोई खुशी।

दुख है हमे तुम अपने शौक पूरे न कर पाए।
अपनी आखरी मंजिल तक न पहुंच पाए।।
सूना सूना सा लगता हैं ये सारा फिल्मी संसार।
रों रहे सभी आज तुम्हारे फिल्मी नाती रिश्तेदार ।

अल्प अवस्था में क्यो तुमने मृत्यु से नाता जोड़ा ?
अभी तो बहुत करना था क्यो फिल्मों से नाता तोड़ा ?
एक चमकता सितारा क्यो गगन से लुप्त हो गया।
फिल्मी जीवन से इतनी जल्दी क्यों मुक्त हो गया।।

तुम थे पक्के राजपूत और मां के सच्चे सपूत।
करनी पड़ी क्यो तुमको ऐसी कच्ची करतूत ?
लगाया क्यो मौत को गले से ऐसे तुमने ?
अभी तो बहुत कार्य करने थे फिल्म जगत में तुमने।।

प्रश्नों पर प्रश्न उलझते जा रहे
कोई भी प्रश्न न सुलझते जा रहे।
जानना चाहता यह सब कुछ जमाना,
आधी हकीकत है आधा फ़साना।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।