देवेन्द्र सोनी हुए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से विभूषित

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इन्दौर।

साहित्य के लिये समर्पित अखिल भारतीय संस्था काव्यकुल संस्थान(पंजी.) के द्वारा  इटारसी मध्यप्रदेश के  राष्ट्रीय युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक देवेन्द्र सोनी को  *गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान* से विभूषित किया गया।काव्यकुल संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानित साहित्यकार *डॉ राजीव पाण्डेय* ने बताया कि संस्था के द्वारा हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर देश और समाज के लिये समर्पित  भाव से पत्रकारिता करने वाले  वरिष्ठ सम्पादक देवेन्द्र सोनी को इस वर्ष दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरुस्कार  गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से अलंकृत किया गया है।डॉ राजीव पाण्डेय ने बताया कि श्री सोनी  43 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में पूरी लगन और निष्ठा के साथ समर्पण भाव से पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित करने में प्राण पण से लगे हुए हैं।प्रिंट मीडिया से ई पत्रकारिता के क्षेत्र में बडी  निर्भीकता से पत्रकारिता करते हुए आज भी युवाओं जैसा जोश लिये , नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त कर रहें हैं और उन्हें सकारात्मक तथा प्रेरणादायी लेखन के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकेइसी समर्पण भाव के कारण आज वैश्विक जगत में भी देवेन्द्र सोनी के कार्यों का मूल्यांकन हो रहा है।   काव्यकुल संस्थान इनके दीर्घायु होने की कामना करता है और आशा करता है कि इसी प्रकार “, युवा प्रवर्तक” के माध्यम से वे युवाओं को रचनात्मक सृजन के लिए प्रेरित करते रहेंगे और अपनी कलम के माध्यम से देश प्रेम की मिशाल कायम करते रहेंगे ।इस सम्मान पर मित्रों ने बधाइयां प्रेषित की हैं।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।