माँ के आँचल में,
सारी दुनिया समाई है।
चाहे कितना भी कमा लें,
इससे बढ़ के न कोई कमाई है॥
जाने कितने दुखों को सहकर,
खुद भूखा और तेरा पेट भरकर।
सारी खुशियों से झोली तेरी भरी,
तो आज कमाने लायक हालत आई है॥
जब भी तुझको बुखार आया,
पूरी रात माँ ने,सिर पर पट्टी लगाई है।
अब बुढ़ापे ने माँ को बिस्तर दिखाया,
तो क्यूँ ख़ुद से दूर कोने में उनकी
खटिया बिछाई है॥
मखमली गद्दे से अपनी सेज तूने सजाई, माँ के हिस्से में आई फटी पुरानी रजाई है।
दूध जिसने अपना तुझको पिलाया है,
वही माँ अब तुझसे क्यूँ हुई पराई है॥
#बिनोद यादव
परिचय : बिनोद यादव की जन्मतिथि- १७ नवम्बर १९९० तथा जन्म स्थान-चांपदानी, हुगली(पश्चिम बंगाल) है। आपने हिन्दी में स्नातक(पूरी नहीं) बेलुर(हावड़ा) करने के बाद कार्यक्षेत्र के रुप में भारतीय सेना (सैनिक) कॊ अपनाया है। वर्तमान में आप गुजरात में निवासरत हैं। लिखना आपकी पसंद का काम है,इसलिए कविता-गीत लिखते हैं। श्री यादव के लेखन का उद्देश्य-शौक और सामाजिक चेतना को जागृत करना है।