माँ का आँचल

0 0
Read Time1 Minute, 3 Second

मुसीबत में छाँव हूँ
ममता की बहार हूँ
स्नेह की सागर हूँ
मैं माता का आँचल हूँ

भूख का अंत हूँ
संस्कार की देवी हूँ
द्वेष का काल हूँ
मैं माता का आँचल हूँ

धूप में छाँव हूँ
दर्द की दवा हूँ
आंधी का आश्रा हूँ
मैं माता का आँचल हूँ

क्रोध में विवेक हूँ
बुद्धि में स्वाभिमानी हूँ
अल्हडता में चंचल हूँ
मैं माता का आँचल हूँ

गीत और लोडी हूँ
स्वभाव का सुन्दर हूँ
रंगो में सबरंग हूँ
मैं माता का आँचल हूँ

“आशुतोष”

नाम। – आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम – आशुतोष
पटना ( बिहार)
कार्यक्षेत्र – जाॅब
शिक्षा – ऑनर्स अर्थशास्त्र
प्रकाशन – नगण्य
सम्मान। – नगण्य
अन्य उलब्धि – कभ्प्यूटर आपरेटर
टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य – सामाजिक जागृति

matruadmin

Next Post

शराब की लाईन

Sun May 10 , 2020
लॉक डाउन में महिलाएं शराब की लाईन में खड़ी थी। एक नहीं आठ आठ बोतलों के लिए वे लडी थी।। पुलिस वाले ने एक महिला से पूछा, बहन,क्या तुम शराब पीती हो ? क्यो तुम इतनी तेज धूप में खड़ी हो ? महिला ने जवाब दिया, मैं शराब नहीं पीती […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।