सर्वेक्षण पृष्ठ पर हिन्दी भाषा ही नहीं

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मुझे स्टार एलायंस की ओर से एक ई-मेल प्राप्त हुआ,जिसमें उन्होंने मुझसे मेरी पिछली हवाई यात्रा के अनुभव के बारे में कुछ प्रश्नों के उत्तर देने का अनुरोध किया था। स्टार एलायंस विमान कंपनियों का एक गठबंधन-समूह है,जिसमें एयर इंडिया सहित विश्व की अनेक विमान कंपनियां शामिल हैंl जब मैं सर्वेक्षण पृष्ठ पर पहुंचा,तो मैंने देखा कि वहां अरबी,तुर्की,चीनी,जापानी,कोरियाई,थाई,पुर्तगाली आदि विभिन्न भाषाओं में सर्वेक्षण के प्रश्न पढ़ने और उत्तर देने का विकल्प उपलब्ध है,किन्तु उस सूची में हिन्दी या भारत की कोई भी भाषा नहीं थी।
अतः मैंने सर्वेक्षण के किसी भी प्रश्न का उत्तर देना अस्वीकार करते हुए स्टार एलायंस को ई-मेल द्वारा यह जवाब भेजा है कि,मैं सर्वेक्षण में भाग लेना चाहता था,किन्तु मेरी प्राथमिक भाषा हिन्दी का विकल्प उपलब्ध न होने के कारण मैं किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं दूंगा। मैंने उन्हें यह ई-मेल अंग्रेज़ी में ही भेजा है,ताकि वे यह स्पष्ट रूप से समझ जाएं कि मैं अंग्रेज़ी भाषा जानता हूँl  इसका अर्थ ये नहीं है कि,मैं सारे काम अंग्रेज़ी में करता हूं या यदि वे सारी सामग्री अंग्रेज़ी में भेजेंगे,तब भी मैं स्वीकार कर लूंगा।
चूंकि भारत की राष्ट्रीय विमान कंपनी एयर इंडिया भी स्टार एलायंस की सदस्य है,इसलिए निश्चित रूप से हिन्दी का विकल्प इसमें अवश्य ही उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। दुखद है कि,अपने ही देश की सरकारी कंपनियां और संस्थाएं भी अपनी भाषा के प्रति आग्रही नहीं हैं।
मेरा सभी से अनुरोध है कि,यदि किसी भी प्रकार के सर्वेक्षण-फीडबैक के लिए कोई भी कंपनी आपसे संपर्क करती है,और आप उसमें भाग लेना चाहते हैं,तो यह अवश्य देखें कि उसमें हिन्दी का विकल्प भी उपलब्ध हो। यदि हिन्दी का विकल्प उपलब्ध नहीं है और आप अंग्रेज़ी में उत्तर देना भी चाहें,तो भी अनुरोध है कि उत्तर देने के साथ-साथ कंपनी को यह भी सूचित करें कि आप भविष्य में ऐसे सर्वेक्षणों के लिए हिन्दी भाषा का विकल्प भी चाहते हैं।
(वैश्विक हिन्दी सम्मेलन)
                                                                                               #सुमंत विद्वांस

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Thu Apr 20 , 2017
टूटकर फिर उगते दरख़्त। उग कर फिर टूटते दरख़्त।। हर मुश्किल से जूझते दरख़्त। आसमां को चूमते दरख़्त।। सर उठाए  झूमते दरख़्त। सर झुकाए जमीं को चूमते दरख़्त।। ज़मीन को न छोड़ते दरख़्त। नहीं किसी को ढूंढते दरख़्त।।   नहीं किसी को छोड़ते दरख़्त। चाहतों की छांव से लुभाते दरख़्त।। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।