साली-सत्ता

 sunil jain
साली देखने में अच्छी लगती है,उसकी बात करने में आनन्द आता है,कुछ को मजा भी आता है। साली के साथ विचरण की इच्छा में न जाने कितने जीजा भ्रष्टाचार की तरह बदनाम हो जाते हैं। साली,सत्ता की तरह होती है। साली के आते ही जीजा की नजरों में अजीब-सी चमक पैदा हो जाती है,वैसे ही जैसे ही नेताजी की सत्ता में आते ही नजरें बदल जाती है। सत्ता और साली की चमक हमेशा बराबर एक जैसी ही बनी रहती है। साली १५ साल की हो,या ५० साल की,उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सत्ता २ साल की हो या ५ साल की,उससे भी फर्क नहीं पड़ता। साली के जाते ही जीजा सुधर जाता है,ऐसा लगता है। सत्ता जाते ही जुनून उतर जाता है। सत्ता के आते ही विपक्ष सीबीआई की भूमिका में और साली के आते ही पत्नी विपक्ष की भूमिका में आ जाती है। 
आखों में साली या भ्रष्टाचार के सपने,दोनों बड़े अच्छे लगते हैं। सत्ता में आते ही नेताजी कुछ से निगाहें फेर लेते हैं,तो कुछ को आंख का काजल बना आंखों में समा लेते हैं। साली के आते ही पत्नी से निगाहें चुराने लगते हैं। साली को काजल-सा आंखों में डालने की कोशिश होने लगती है। पत्नी को साली भ्रष्टाचार लगती है और पति को साली सत्ता। सत्ता पाने के लिए नेताजी साम-दाम-दण्ड-भेद अपनाता है,यही लालसा पति में साली को निहारने में दिखाई देती है।   
साली हो या सत्ता,दोनों केे रहते अजब-सा उत्साह रहता है। चारों तरफ वृंदावन बगीचा नजर आने लगता है। दोनों में ही भोग की लालसा होती है,भय भी होता है कहीं सीबीआई न देख ले।  साली के साथ देख लोग जल-भुन जाते हैं,सत्ताधारी को देखकर भी कुछ ऐसी ही अनुभूति होती है। दोनों ही स्थितियों में यह सोचते हैं-हाय हम न हुए।
शादी के बाद साली,और सत्ता के बाद भ्रष्टाचार का आवागमन बढ़ जाता है। न साली हाथ आती है,न भ्रष्टाचार। साली दिखाई देती है,भ्रष्टाचार भी दिखाई देता है,न कोई साली को पकड़ पाता है न भ्रष्टाचार को। नए जीजा ससुराल के चक्कर उसी तरह काटते हैं,जैसे नेता विदेश केे। 
साली ही नहीं,जीजा (नेता) भी जब  गांव में आते हैं,तो साली जनता तो क्या गांव चहक-महक (शराब) उठते हैं,पेड़ खिल उठते हैं,जानवर (भय से) पूंछ उठाकर इधर-उधर भागने लगते हैं। जब नेताजी की जीप के साथ १०-१२ मोटरसाइकिल,५-७ कार वीआईपी हारन के साथ में गांव में घुसती है। सड़क धूल उड़ाकर उनका स्वागत करती है,सड़क पर पड़े पत्थर उछल-उछलकर हर्ष जाहिर करने लगते हैं,गडढे खुशी में और गहरे हो जाते हैंl उनको भी लगता है,उनके दिन फिरने वाले हैं। शाला का शिक्षक टूटी कुर्सी पर बैठकर बच्चों को फटी चटाई पर आराम से बैठने का आदेश देता है। गांव का पटेल जवान लड़की के साथ थाल में गुड़ के साथ स्वागत में खड़ा हो जाता है। चैकीदार टूटे डंडे के साथ फटी पुरानी वर्दी में मुस्तैद दिखाई देने लगता है। 
साली जनता इठलाती है,उसके जीजा आए हैं,शहर से जरूर विकास लाए होंगे,इस बार जरूर उसके लिए नई चुनरी होगी, जिससे वह अपनी इज्जत को ढंक पाएगी। पिछली बार भी कह गए थे,तेरे चरणों में सड़क नई होगी,खेत में पानी होगा,फसल की तरह तू लहलहाएगी। जीजा के आने से साली के साथ-साथ उसकी सहेलियां भी उमंग में नहा जाती हैं। 
जीजा आते हैं,साली जनता का शोषण करते हैं। फिर से जनता साली,जीजा के इंतजार में पलक-पावड़े बिछाए ५ साल तक के इंतजार में  अपना आंचल फैलाकर रह जाती है।
इस बार भी जीजाजी आए,साम्प्रदायिकता,जातिवाद,भाई भतीजावाद से हाथ मिला धूल उड़ाती जीप से फुर्र हो गए। 
                                                              #सुनील जैन ‘राही'
परिचय : सुनील जैन `राही` का जन्म स्थान पाढ़म (जिला-मैनपुरी,फिरोजाबाद ) है| आप हिन्दी,मराठी,गुजराती (कार्यसाधक ज्ञान) भाषा जानते हैंl आपने बी.कामॅ. की शिक्षा मध्यप्रदेश के खरगोन से तथा एम.ए.(हिन्दी)मुंबई विश्वविद्यालय) से करने के साथ ही बीटीसी भी किया हैl  पालम गांव(नई दिल्ली) निवासी श्री जैन के प्रकाशन देखें तो,व्यंग्य संग्रह-झम्मन सरकार,व्यंग्य चालीसा सहित सम्पादन भी आपके नाम हैl कुछ रचनाएं अभी प्रकाशन में हैं तो कई दैनिक समाचार पत्रों में आपकी लेखनी का प्रकाशन होने के साथ ही आकाशवाणी(मुंबई-दिल्ली)से कविताओं का सीधा और दूरदर्शन से भी कविताओं का प्रसारण हुआ हैl आपने बाबा साहेब आंबेडकर के मराठी भाषणों का हिन्दी अनुवाद भी किया हैl मराठी के दो धारावाहिकों सहित 12 आलेखों का अनुवाद भी कर चुके हैंl रेडियो सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 45 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएं प्रसारित-प्रकाशित हो चुकी हैं। आप मुंबई विश्वद्यालय में नामी रचनाओं पर पर्चा पठन भी कर चुके हैंl कई अखबार में नियमित व्यंग्य लेखन जारी हैl

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