मानव अधिकार

आज जरूरत है मानव की,
विश्व शांति कायम होवे।
वतन मान की सोच रखें पर
विश्व मनुजता क्यों खोवे।
मानव तो बस मानव होता,
मानवता के गुणधारी।
देश धर्म में बाँट मनुज को,
राज करे सत्ता धारी।

कुछ देशों की तानाशाही,
कुछ को भारी पड़ती है।
सत्ता की यह खेंचातानी,
मनुज भुगतनी पड़ती है।
मानव के अधिकार सिमटते,
देशों की टकराहट में।
जाने कितनी आहें घुटती,
हथियारों की आहट में।

चाहे समय विकासी पहिया,
बदलो सोच जगत की अब।
विश्व शांति के पथ पर बढ़कर,
मानवता की सोचें सब।
मनुजाधिकार दमित न होवे,
सत्ताई संघर्षों में।
करें विकास मानवी मानव
आने वाले वर्षों में।
. 👀🤱👀
२. रंग-भेद के खिलाफ,
बहका क्यों है रे मानव मन,
तन की रंग गुमानी में।
चमड़ी के रंग से मानव में
भेद करे नादानी में।
देख हमारे श्याम कन्हैया,
हम तो अब तक पूज रहे।
त्रेता युग के राम देखलो,
राम राज्य की सूझ रहे।

तन के वर्ण ऊतको से ही,
रंग त्वचा का बनता है।
जलवायु के कारण भी तन
गोरा काला लगता है।
रंग भेद का बापू ने भी
समझो खूब विरोध किया।
रक्त सभी का लाल मानवी,
कितना चाहे शोध किया।

तन के रंग भेद को भूलो,
गुण बल बुद्धि सभी जानो।
मानव होकर भी मानव को,
रंगो से मत अपमानो।
गोरा काला उभय रंग है,
दोनो का ही मान रहे।
रंग भेद के कारण सोचो,
मानवता अपमान सहे।
. 👀🤱👀
३. विश्व में महामारियों
की रोकथाम,
आज विश्व परिवार बना लो,
सबके सुख दुख साझी हों।
सक्षम वतन बढ़ें आगे ज्यों,
मँझधारों के माँझी हों।
जैसे चेचक सी बीमारी
सबने मिलकर खोई है।
और पोलियो की तकलीफें
इस धरती से धोई है।

शेष अभी तो है बीमारी,
टी बी, कैंसर,अनजानी।
मिलकर सकल विश्व के देशो,
बीमारी जड़ मूल मिटानी।
टीके खोजो,और दवाई,
आपस में साझा करलो।
सभी निरोगी हों वसुधा पर,
मानव पीड़ा को हरलो।

नाम–बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।