किस पर लिखूं मैं…

3

naroliya

जिंदगी की कल्पना करूं या,मौत लिखूं..
मैं लिखूं तो आखिर किस पर लिखूं ।

फूलों की क्यारियों में है कांटों की चुभन भी,
महकते कश्मीर में है बारूद की धमक भी..
इंसान की मासूमियत कहूं या जुल्म लिखू मैं,
लिखूं तो आखिर किस पर लिखू मैं ।

एकता में घुल चुकी दंगों की गूंज भी,
धर्म के हुजूम में है फिरकापरस्त भी..
मस्जिद में अजान कहूं या गीता लिखूं मैं,
लिखूं तो आखिर किस पर लिखूं मैं ।

आजादी में है पल रहे कई गुलाम भी,
रोटी के लिए लड़ रहे यहां यार भी..
महफिलों की शाम लिखूं या भूख लिखूं..
मैं लिखूं तो आखिर किस पर लिखूं….।

    #रविंद्र नारोलिया

परिचय : इंदौर(मध्यप्रदेश) के परदेशीपुरा क्षेत्र में रविंद्र नारोलिया रहते हैं। आपका व्यवसाय ग्राफिक्स का है और दैनिक अखबार में भी ग्राफिक्स डिज़ाइनर के रुप में ही कार्यरत हैं। 1971 में जन्मे रविंद्र जी कॊ लेखन के गुण विरासत में मिले हैं,क्योंकि पिता (स्व.)पन्नालाल नारोलिया प्रसिद्ध कथाकार रहे हैं। आप रिश्तों और मौजूदा हालातों पर अच्छी कलम चलाते हैं।

matruadmin

3 thoughts on “किस पर लिखूं मैं…

  1. जमीं पर लिख, आसमां पर लिख
    अपनों पर लिख, परायो पर लिख
    क्या गीता, क्या कुरान
    तू हर इंसान पर लिख,

    लिखना तेरी फितरत नहीं
    इसे अपना धर्म समझ,
    दूसरों पर तो सब लिखते हैं
    तू अपने हर अंदाज पर लिख।

Comments are closed.

Next Post

गुड़ यारों गोबर बन जाएगा...

Fri Mar 3 , 2017
आशिक जब माशूका का शौहर बन जाएगा, इश्क का मीठा गुड़ यारों गोबर बन जाएगा। कहलाएगा बॉस शहर में,पर अपने घर में, बेगम का ताबेदार वो नौकर बन जाएगा। रोएगा दिल में,हँस के दिखलाए महफ़िल में, अपने ही घर सर्कस का जोकर बन जाएगा। आया तो बन चुका,वो बच्चों को […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।