अग्रप्रर्वतक महाराजा अग्रसेन जी

पाँच हजार वर्ष पूर्व भारत में जन्मे एक दिव्य महान,
वैभवशाली महाराजा अग्रसेन जी अग्रवंश के भगवान।

प्रताप नगर के राजा अग्रसेन जी अग्रोहा जिनकी धाम,
प्रेम, त्याग, करुणा की प्रतिमूर्ति जन सेवा करना काम।

धनपाल के पौत्र अग्रसेन जी राजा वल्लभ की संतान,
प्रताप नगर के राजा थे सत्य-अंहिसा के प्रतिमान।

अग्रकुल देवी महालक्ष्मी के उपासक किये काम महान,
दीन-दुखियों की सेवा करना, उच्च गुणों की खान।

एक ईंट एक रुपया दे सबको भेदभाव किया समाप्त,
अमीर-गरीब को एकसूत्र में पिरोना था बस पर्याप्त।

सोलह विवाह किये मगर माधवी थी उनकी प्यारी,
आठ भाई एक बहिन मुकुटा थी उन सबकी दुलारी।

पशुबलि से घृणित हुये अठारह यज्ञ न हो सका पूरा,
यज्ञ के आधार पे गोत्र रखे मगर गोयन रह गया अधूरा।

अग्रप्रर्वतक महाराजा अग्रसेन सबकी आँखों के तारे,
पराक्रमी राजा शूरसेन अग्रसेन को पूजे अग्रवाल सारे।

जीओ व जीने दो में है सम्पूर्ण मानवता का कल्याण,
ऐसे सिद्धांतों की दास्तान थे वो जीते जागते प्रमाण।

गर्व हमें अग्रवाल होने पर हम अग्रकुल की संतान,
हमारे वैश्य समाज की ताकत एकजुटता ही उत्थान।

#सुमन अग्रवाल “सागरिका”
आगरा(उत्तरप्रदेश)
नाम :- सुमन अग्रवाल

पिता का नाम :- श्री रामजी लाल सिंघल
माता का नाम :- श्रीमती उर्मिला देवी
शिक्षा :-बी. ए.
व्यवसाय :- हाउस वाइफ
प्रकाशित रचनाएँ :-
प्रकाशित रचनाओं का विवरण :-
1.अग्रवंश दर्पण :-“नारी सुरक्षा चूंक कहाँ “, “महिला सशक्तिकरण “, “500-1000 के नोट बाय-बाय”, “दहेज प्रथा”, “अग्रप्रर्वतक महाराज अग्रसेन जी पर कविता” इत्यादि।
2.हिचकी :- “ये होली का त्यौहार”
3.D.L.A :- “आतंकवाद”, “बालदिवस”, “करवा चौथ”, आतंक का साया, “नववर्ष मुबारक”, “राष्ट्रप्रेमी” इत्यादि।
4.नारी शक्ति सागर :- “ग़ज़ल”

वर्तमान अंकुर नोएडा :- “घर-परिवार, नारी शक्ति, भारतीय लोकतंत्र
साहित्य एक्सप्रेस में – नव संवत्सर
6.सहित्यापीडिया :- माँ

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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