हमारी बात कर लिया करो

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हमारी बात कर लिया करो,
मिलने के संदर्भ हों या बिछुड़ने के,
पूजा-पाठ का सिलसिला हो या टहलने का,
ज्ञात कहानी हो या अज्ञात ,
चलने की बात हो या रूकने की,
शब्दों से कहना हो या मौन से,
बचपन के किस्से हों या जवानी के
लड़ाइयों का होन हो या विलुप्त होना,
दुनिया के इस भाग में हों या उस भाग में,
कभी हमारी बात कर लिया करो।
सोचने की मुद्रा में हों या शून्यता की,
संस्कृति बना रहे हों या मिटा रहे हों,
दयावान बन रहे हों या क्रूर,
भव्य लग रहे हों या दिव्य,
हमारा परिणाम जान लिया करो।
कहीं गा रहे हों या सो रहे हों
जंगल में हों या गाँव-शहर में,
मुस्कान में प्रस्फुटित हो रहे हों या हँसी में फूट रहे हों,
महक रहे हों या भिनभिना रहे हों,
घर पर हों या धूप में तप रहे हों,
कभी हमारी पूछताछ कर लिया करो।

#महेश रौतेला

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।