नई शिक्षा नीति हेतु संभागीय स्तरीय कार्यशाला में धार जिले के शिक्षाविदों ने दिए सराहनीय सुझाव

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धार |
 *नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति* को लेकर  उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर इंदौर में शिक्षा महाविद्यालय देवास द्वारा आयोजित संभागीय स्तरीय  कार्यशाला में धार जिले के *जयन्त जोशी, शिक्षाविद  महेंद्र शर्मा डाइट प्राचार्य , केशव वर्मा, एडीपीसी रमसा, ठाकुरलाल मालवीय एपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र ,सोमला सिसौदिया प्राचार्य माडल स्कूल एवं गोपाल कौशल सहायक अध्यापक* ने सहभागिता कर अपने प्रभावी सुझाव देकर प्रस्तुत किए जिन्हें काफी सराहा गया । इस अवसर पर *शिक्षक गोपाल कौशल ने आठ बिंदुओं पर अपने व नवोदय क्रांति परिवार द्वारा दिए सुझावों का फोल्डर भी जेडी मनीष वर्मा को प्रदान किया ।* जेडी वर्मा ने बताया कि प्राप्त उत्कृष्ट सुझावों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय भेजा जाएंगा । उक्त संभागीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्री मनीष वर्मा, संयुक्त संचालक, इंदौर संभाग , के. के . पांडेय  शिक्षाविद्,  श्रीमती शर्मा प्राचार्य शिक्षा महाविद्यालय देवास  ने समन्वय कर कार्यशाला का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में  चर्चा के  दौरान उभरे संशोधनों और सुझावों को भारत सरकार को भेजा जाएगा।
            #गोपाल कौशल

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।