सफ़र

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चलते हैं जो रास्ते वो सफ़र,
जो साथ चले वो होता हमसफ़र।

हर इंसा तय करता अपना सफ़र,
कभी किसी शाम तो कभी शहर।

रास्ते बदले,लोग बदले,बदले हमसफ़र,
दिया न साथ,सब धोखेबाज़ निकले।

बिन रुके पाया अपना मुकाम,
लाख कोशिश की न हुआ नाकाम।

कठिन श्रम से दौड़ाई सफलता की लहर,
घर-आंगन में हुआ खुशी का पहर।

कठोर तप,मेहनत,सहनशक्ति से मिली मंजिल।
तब जाकर अब इस सफ़र में हुए लोग शामिल।।

                                                                               #तृप्ति तोमर

परिचय : भोपाल निवासी तृप्ति तोमर पेशेवर लेखिका नहीं है,पर छात्रा के रुप में जीवन के रिश्तों कॊ अच्छा समझती हैं।यही भावना इनकी रचनाओं में समझी जा सकती है। मध्य प्रदेश के भोपाल से ताल्लुक रखने वाली तृप्ति की लेखन उम्र तो छोटी ही है,पर लिखने के शौक ने बस इन्हें जमा दिया है।

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