
देखो आजकल के हालात
पूछता है दिल ,पूछती है निगाहें
ना जाने कितने सवाल
टिक नहीं पाती आईने के आगे
नजरें चुरा लेती हूँ
अंदर दबाना चाहती हूँ आवाज
फिर भी जाने कैसे
छलक जाते हैं आंसू
एक-एक बूंद से उभर आए
अपने दबे हुए जज़्बात
कहां छिपूं जाऊं कहां
आख़िर मैं भी तो हूँ एक माँ
मेरी भी बेटियाँ हैं!
इसी सोच में डूबी हूँ
अखबार पर पड़ी नज़रें
उस पर लिखी खबर से
फिर पहुंचा दिल पर आघात
जाने कब बदलेंगे
बेटियों के हालात
बेटियों के हालात।
#कल्पना गुप्ताकल्पना रत्न

