साहित्यकार जिलाधीश की अभिनव पहल, जिले में कर रहे हैं पुस्तकालय की स्थापना

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बिलासपुर।
खबर अपने आप में प्रेरक है, क्योंकि साहित्य, अध्ययन तथा लेखन में रुचि रखने वाले जिलाधीश डॉ. संजय अलंग ने पठन-पाठन को प्रोत्साहित करने के लिए एक पुस्तकालय स्थापित करने के लिए अभिनव पहल करते हुए लोगों से किताबें दान करने की अपील की है।
जिला शिक्षा अधिकारी किताबों के संग्रह के लिए अधिकृत किये गए हैं।
जिलाधीश डॉ. अलंग का मानना है कि एक जागरूक समाज में किताबों का बड़ा महत्व है। ये जीवन को दिशा देती हैं। किताबें हर किसी को पढ़नी चाहिए। वे स्वयं एक अच्छे लेखक हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास व संस्कृति पर उनकी कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।
इसी कड़ी में उन्होंने बिलासपुर में पुस्तकों का संग्रह कर उन्हें अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जिलाधीश डॉ.अलंग ने लोगों से अपील की है कि वे खेल, साहित्य, कला,संस्कृति, इतिहास व अन्य विधाओं की किताबें दान करें। वे ऐसी किताबें दान कर सकते हैं, जिन्हें वे पढ़ चुके हैं। इन किताबों को आम जन पढ़कर लाभ ले सकेंगे। लोगों द्वारा दी गई किताबों को संग्रहित करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर को जिम्मेदारी दी गई है।
       जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी स्थानों से किताबें आएं इसके लिए वे सभी शालाओं के प्राचार्यों को पत्र भी जारी कर रहे है। कोई भी व्यक्ति उनके कार्यालय में आकर किताबें जमा कर सकता है। मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा ऐसे साहित्यकार एवं जागरूक जिलाधीश डॉ संजय अलंग को पुस्तक क्रांति के उन्नयन हेतु हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।