बच्चपन की धुधली सी यादें
होठो की प्यारी सी मुस्कुराहट
घंटो एक दूसरे को तंग करना
शायद अब याद आ रहा है ।।
स्कूल दिनो की वो मस्ती
बिना मतलव का झगरना
एक दूसरे को नीचा दिखाना
शायद अब याद आ रहा है ।।
अपनी नटखट पन से
कभी कृष्ण,तो कभी राधा बन
मोहल्ले वासी को तंग करना
शायद अब याद आ रहा है ।।
बच्चपन की वो कच्ची गली
खेलते दोस्तो संग दिन-भर
मूंगफली खाने जाते,खेत-खलिहान
शायद वो मस्ती अब याद आ रहा है ।।
खूद की गलती पर,
पापा की डॉट,माँ का प्यार
बचपन की यह रंगीन पल
शायद अब याद आ रहा है ।।
परिचय :-
पूर्ण नाम – पुष्कर कुमार
साहित्यिक उपनाम – पुष्कर कुमार भारती
वर्तमान पता- ग्राम-दियारी,जिला-अररिया
स्थाई पता- अररिया(बिहार)
पूर्ण शिक्षा- BA(POLITICAL SCIENCE)
कार्यक्षेत्र- विद्दार्थी/लेखन कार्य
लेखन विधा- कविता,सामाजिक लेख
भाषा ज्ञान- हिन्दी
लेखनी का उद्देश्य – सामाज की कुरीतियो को लेखन के माध्यम से मिटाने का प्रयत्न करना
रुचियाँ – लेखन कार्य और किताब पढना
Sat Jun 1 , 2019
मई जून का माह है ऐसा,लगे कि सब जल जायेगा इस गर्मी से हमे बचाने,बादल कब जल लायेगा।। कोई कहता उमस बढ़ी है,किसी के गर्मी सिर पे चढ़ी है खून किसी का उबल रहा है,किसी की बीपी सबपे बढ़ी है जो चिड़ियां दौड़ा करती थी,देखो कितनी सुप्त पड़ी है सोचूं […]