आधा सुखा आधा हरा
एक पेड़ फुलो से भरा
बढता देख पर्यावरण प्रदूषण
मिलने लगे भयंकर लक्षण
सुंदरता भी खोने लगी
सूरज से धरती तपने लगी
कभी जल से भरे थे तालाब
जब से उमड़ा मानव का सैलाब
एक एक दिन बीत रहे थे
तालाब लगातार सूख रहे थे
भीषण गर्मी पड़े अकाल
जब से मानव ने चली थी चाल
सुखी धरती गरीयाती रही
पर मनु को उस पर दया न आयी
पता था फिर भी बदलाव न लायें
अब परिणाम खुद भुगतायें
बोल रहा हूँ अब भी चेतो
नहीं तो संसार देखोगे जलतो
#उपकार सारांश
परिचय-नाम-श्रवणराम पटेल
साहित्यिक उपनाम-उपकार सारांश
वर्तमान पता-खुडाला लुनी
राज्य-राजस्थान
शहर- जोधपुर
शिक्षा- B.A.arts
कार्यक्षेत्र-हिन्दी साहित्य
विधा – गद्य पद्म
प्रकाशन-
सम्मान-
ब्लॉग-
अन्य उपलब्धियाँ-प्रथम प्रकाशन
लेखन का उद्देश्य- हिन्दी साहित्य को बढ़ावा देना
Tue Apr 23 , 2019
(विश्व पृथ्वी दिवस) लें शपथ मिलकर सभी, वृक्ष न काटेंगे कभी। जो हर आंगन में वृक्ष होगा तो ही कल हमारा जीवन होगा। जब चारों ओर हरियाली होगी, तभी तो खुशहाली भी होगी। निसर्ग में जो विटप लगेगा, आने वाला संकट टलेगा। वृक्ष हमारे हैं हितैषी, फिर क्यों बने हम […]