क्या दिया प्रणाम ने

sanjay
दोस्तों,आज के इस कलयुगी और मायाचारी संसार में हम और आप अपनी संस्कृति को बिलकुल से ही खो चुके हैं।पश्चिमी सभ्यता को अपने जीवन के साथ अपने घरों में भी सजाने और व्यवहार में अपनाने लगे हैं। इस चक्कर में भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पुरानी व रूढ़िवादी बताते हुए युवा पीढ़ी उसका विरोध करने लगी है। इसी बाद को सही  साबित करने के लिए छोटा-सा दृष्टांत बताना चाहता हूँ। पुरानी कहानी बताना चाहता हूँ,जिससे मैं आपको प्रणाम का महत्त्व समझा सकूँ । महाभारत का युद्ध चल रहा था,तो एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर ‘भीष्म पितामह’ घोषणा कर देते हैं कि,’मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा’ । उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई ।भीष्म पितामह की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था,इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए। तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो।श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए। शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि, अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो। द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने ‘अखंड सौभाग्यवती भव’ का आशीर्वाद दे दिया।फिर द्रोपदी से पूछा कि, ‘वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो,क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आए हैं ?’ तब द्रोपदी ने कहा कि,’हां,और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं’। तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया। भीष्म ने कहा- ‘मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते हैं।’
शिविर से वापस लौटते समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि,’तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है।’ अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य,आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन-दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती,तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती। इससे तात्पर्य्यह है कि,वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याएं हैं, उनका भी मूल कारण यही है कि ‘जाने-अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है।’ यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो।बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं, उनको कोई ‘अस्त्र-शस्त्र’ नहीं भेद सकता है। सभी से निवेदन है कि,आप इस संस्कृति को सुनिश्चित कर नियमबद्ध करें तो घर स्वर्ग बन जाएगा,क्योंकि प्रणाम प्रेम है, प्रणाम अनुशासन है। प्रणाम शीतलता है और प्रणाम आदर ही सिखाता है। प्रणाम से सुविचार आते हैं ,इससे आत्मशांति मिलती है। प्रणाम  झुकना सिखाता है,साथ ही प्रणाम क्रोध को भी मिटाता है। प्रणाम आँसू धो देता है,जिससे हमारी सारी कटुता ह्रदय से निकल जाती है। ऐसे ही प्रणाम अहंकार मिटाता है और हमें अच्छे और सच्चे संस्कार के साथ ही संस्कृति भी देता है।
बड़े-बुजुर्गों की छत्रछाया में रहने से सदा ही हमारा जीवन एकदम से स्वर्ग बना रहता है। हमें अपनी भारतीय संस्कृति को सदा जीवन में बनाए रखकर दिल-दिमाग में सजाए रखना चाहिए।

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।