पदमश्री नरसिंह देव जम्वाल, यशपाल निर्मल, केवल कुमार केवल और संजीव शर्मा सम्मानित।

IMG-20190205-WA0054
जम्मू  |
डोगरी भाशा अकैडमी, जम्मू और गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, ज्यौड़ियां के संयुक्त तत्वावदान में आयोजित सम्मान समारोह में डोगरी साहित्यकार पद्मश्री नरसिंह देव जम्वाल, यशपाल निर्मल और केवल कुमार केवल को डोगरी साहित्य में अभूतपूर्व योगदान के लिए और संजीव शर्मा को खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक  सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, ज्यौड़ियां में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के प्रधानाचार्य श्री एन पी सिंह ने की। मंच संचालन डोगरी भाशा अकैडमी के प्रधान श्री रोशन बराल रोशन ने किया। इस अवसर पर श्री अजय शर्मा ने श्री नरसिंह देव जम्वाल के जीवन और व्यक्तिव पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। डा. कामिनी ने यशपाल निर्मल के जीवन और व्यक्तित्व पर अपना पत्र पढ़ा। श्री रोशन बराल रोशन ने श्री केवल कुमार केवल और श्री संजीव शर्मा के योगदान को उल्लेखित करते हुए अपने पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में सभी साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए और विद्यार्थियें को अपनी कविताएं बी सुनाई। सभी विद्यार्थियें, अध्यापकों एवं अन्य स्टाफ ने बहुत सराहा। कार्यक्रम के अंत में डा. सुदर्शन खजूरिया ने सभी अतिथियों का विधिवत धन्यवाद किया।

matruadmin

Next Post

शिक्षा का माध्यम मातृभाषाएँ

Tue Feb 5 , 2019
मातृभाषा का मतलब है कि, माँ से सीखी और बोली जाती भाषा का नाम मातृभाषा है | बालक जन्म के बाद पहली बार जो भाषा बोलता है, वो भाषा अपनी माँ की और उसकी मातृभाषा है | माँ से ही वो मातृभाषा सीखता है | विश्व में ६००० से अधिक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।