पदमश्री नरसिंह देव जम्वाल, यशपाल निर्मल, केवल कुमार केवल और संजीव शर्मा सम्मानित।

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जम्मू  |
डोगरी भाशा अकैडमी, जम्मू और गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, ज्यौड़ियां के संयुक्त तत्वावदान में आयोजित सम्मान समारोह में डोगरी साहित्यकार पद्मश्री नरसिंह देव जम्वाल, यशपाल निर्मल और केवल कुमार केवल को डोगरी साहित्य में अभूतपूर्व योगदान के लिए और संजीव शर्मा को खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक  सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, ज्यौड़ियां में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के प्रधानाचार्य श्री एन पी सिंह ने की। मंच संचालन डोगरी भाशा अकैडमी के प्रधान श्री रोशन बराल रोशन ने किया। इस अवसर पर श्री अजय शर्मा ने श्री नरसिंह देव जम्वाल के जीवन और व्यक्तिव पर अपना पत्र प्रस्तुत किया। डा. कामिनी ने यशपाल निर्मल के जीवन और व्यक्तित्व पर अपना पत्र पढ़ा। श्री रोशन बराल रोशन ने श्री केवल कुमार केवल और श्री संजीव शर्मा के योगदान को उल्लेखित करते हुए अपने पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में सभी साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए और विद्यार्थियें को अपनी कविताएं बी सुनाई। सभी विद्यार्थियें, अध्यापकों एवं अन्य स्टाफ ने बहुत सराहा। कार्यक्रम के अंत में डा. सुदर्शन खजूरिया ने सभी अतिथियों का विधिवत धन्यवाद किया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।