हम भारत माँ के लाल

0 0
Read Time1 Minute, 54 Second
ashok sapada
हम भारत माँ के लाल कैसे सह लेंगे अपमान
हमकों अपनी बेटियों में भी दिखता हिंदुस्तान
यादें कहती हमकों की चितौड़ हमारा सदा से
पंजाबी शौर्य गाथा गाते गुरु गोविंद जी महान
कभी अवंति बाई तो कभी लक्ष्मी बाई आती
धरती का प्यास बुझाने चलाती दोनो कृपाण
कभी मरकर भी मरतें नहीं शहिद यहां पर
बलिदानियों का देश सदा करता यहाँ सम्मान
गर कर्ण जैसे दानी हमने पैदा किया भारत मे
तो दानव बरबरीक मातृभूमि के देता शीशदान
अपने ही पौरष बल से छत्रपती का पद पाया
शिवाजी के आगे सर झुकाओ वर्ना दोगे प्राण
सदा ही लहराया भगवा शत्रुदल चकित करके
वीर माता जिजाऊ की थी फौलादी वो सन्तान
गद्दारों ने सदा ग़द्दारी की जयचंद अम्बी बनकर
पर मंगल किया मंगलपांडे ने देकर अपनी जान
खुदीराम चंदू आजाद भगतसिंह सब याद आते
माथे चंदन रक्त का करके करते शहीदों का ध्यान
हमें जन्म देने वाली भारत माता धन्यवाद तेरा है
जन गण मन के हम अधिनायक तुझपर कुर्बान
देश बांटो नहीं खण्ड खण्ड अपना ये कहतें है
वरना हम भारत के लाल ले लेंगे तुम्हारी जान
#अशोक सपड़ा हमदर्द
 
परिचय-दिल्ली निवासी अशोक सपड़ा हमदर्द जो 30 जनवरी 1977 को जन्में व इग्नु से स्नातक तक पढ़े जिनकी कई पत्र पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित होते है| अब तक दो काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके है|

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बसंत

Fri Jan 18 , 2019
शीत बीता बसंत लौटा बहारों का मौसम लौटा फूलों के इस मौसम में भंवरों का यौवन लौटा मस्ती में भंवरों की पुष्प पराग को ललचाती है। आम के मंजरो पर कोयल काली इठलाती गाती गीत सुनाती है। खेतों में पीली सरसों फूलाती बसंती हवा के झोकों पर लहराती नवीन फसलों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।