
पगडंडियों के सहारे,
सफर तय न करना..
खुद से रास्ता बनाने
का हौंसला रखना।
चलना लीक पर सदैव,
पर लीक से हटकर भी..
कुछ नया करना
पगडण्डियों के सहारे
यूँ कमजोर मत बनना।
कायम रखना स्वयं का,
अस्तित्व कि..
हर रहगुज़र पूछे तुम्हारी
ऊँचाई का रास्ता।
रोशन करते रहना अँधेरों
में भी अपने तेज का प्रकाश..
ताकि…
लोग समझे पगडंडियों के
सहारे नहीं,अब रास्ते
बनाना हैै पगडण्डियों
को सहारे हमारे।
#शालिनी साहू


बहुत सुंदर बधाई
Very very good your poem….