सीता

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निमि की वंशज हूँ मैं,
सूर्यवंश की परिणीता।
जो त्रैलोक्य का स्वामी है,
उसका मन मैंने जीता।।
विधि से लभ्य हुए सब साधन,
किन्तु अभाव में बीता जीवन।
सप्तपदी से सप्तजनम का,
साथ तुम्हारा प्रेय बना।
वनवास तुम्हें जब श्रेय हुआ,
मेरा भी गृह अरण्य बना।।
मेरा कब, कितना दोष रहा,
मेरा मन उत्तर खोज रहा।।
लंकेश ने हर लिया मुझे,
हर लिया गात, मन हर न सका।
वो स्वर्ण सदन का स्वामी भी,
दृष्टि तक मुझ पर धर न सका।।
मेरी मुक्ति हित जाने तुमने,
कितने कष्टों का वरण किया।
हारा वह दम्भी दशानन,
तुमने ही जय को वरण किया।।
तो क्या जीता तुमने रघुवर?
मुझ वैदेही को या कि समर।
जब अग्नि परीक्षा हुई प्रखर,
क्यों हुआ साथ अपना न अमर?
केवल एक जन के प्रलाप पर,
रघुवर ,मुझको क्यों त्याग दिया।
मेरे उदर में जो था तवांश,
उसको भी दुःख का भाग दिया।।
दाम्पत्य धर्म की नींव सदा,
विश्वास ,प्रेम को माना हैं।
मर्यादा के पुरुषोत्तम क्यों?
जनश्रुति को ज्यादा जाना है।।
पुरुष त्याग सकता वह जन,
जहाँ प्रेम सूत्र से गुम्फित मन।
क्या अग्नि परीक्षा है उचित?
विश्वास जहाँ रहता अखण्ड।।
माना तुम जन अवतारी हो,
सारी माया पर भारी हो।
 पर न्याय नारी से कर न सके,
नारी की पीड़ा हर न सके।।
#पायल शर्मा, डूंगरपुर

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Tue Jan 1 , 2019
शहरों में कहां मिलता है वो सुकून जो गांव में था, जो मां की गोदी और नीम पीपल की छांव में था, वो बचपन वाली रिमझिम रिमझिम होती बरसात, वो हमारी मेहनत से बनाई कागज़ की नाव में था, वो लुका छिपी और पकड़म पकड़ाई के खेल में, साइकिल सीखते […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।