बिटिया का घर

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archana dube

बिटिया भी चिड़ियाँ होती है

पर पंख नहीं होते उनके

दो जगहों का सुंदर रिश्ता

मायका, ससुराल

पर घर नहीं होते उनके ।

जनम दिया जिस मात – पिता ने

कहते बेटी तो परायी है

ससुराल में जब जाती बेटी

सास – ससुर कहते …..

ये तो परायी घर से आयी है ।

ईश्वर से यह प्रश्न है मेरा

किस घर के लिए मुझे बनाया है……

माइका व ससुराल का रिश्ता

परायी और पराया है ।

पक्षी भी दाना चुगने को

दूर देश को जाते हैं

संध्याकाल हो जाने पर

वापस अपने घर आ जाते है ।

क्यों बेटी का इस दुनियां में

करता कोई खयाल नहीं

पिता के घर की वही लाडली

ससुराल में कितना अपमान सहे ।

किस घर को बेटी अपनाये

जिस घर में जन्म हुआ उसका

या फिर उस घर को अपनाये

जहां पिता ने उसका कन्यादान किया ।

परिचय-

नाम  -डॉ. अर्चना दुबे

मुम्बई(महाराष्ट्र)

जन्म स्थान  –   जिला- जौनपुर (उत्तर प्रदेश)

शिक्षा –  एम.ए., पीएच-डी.

कार्यक्षेत्र  –  स्वच्छंद  लेखनकार्य

लेखन विधा  –  गीत, गज़ल, लेख, कहाँनी, लघुकथा, कविता, समीक्षा आदि विधा पर ।

कोई प्रकाशन  संग्रह / किताब  –  दो साझा काव्य संग्रह ।

रचना प्रकाशन  –  मेट्रो दिनांक हिंदी साप्ताहिक अखबार (मुम्बई ) से  मार्च 2018 से ( सह सम्पादक ) का कार्य ।

  • काव्य स्पंदन पत्रिका साप्ताहिक (दिल्ली) प्रति सप्ताह कविता, गज़ल प्रकाशित ।

  • कई हिंदी अखबार और पत्रिकाओं में लेख, कहाँनी, कविता, गज़ल, लघुकथा, समीक्षा प्रकाशित ।

  • दर्जनों से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रपत्र वाचन ।

  • अंर्तराष्ट्रीय पत्रिका में 4 लेख प्रकाशित ।

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