उम्र; चालीस पार कर चुकी है,
पुनः एक बड़े अंतराल के बाद,
गहरी नींद में सोई ख़्वाहिशें ,
करवटें लेने लगीं हैं……
फिर इक बार उम्र लौट रही,
छूटी राहें ,अधूरे सपने,छटपटाते,
अन्तर्मन व्याकुल बहुत ही,
खुली हवा में सांस लेना चाहता….
कोशिशें प्रबल हो रही मेरे द्वारा,
खुद को समझने ,समझाने की,
आइना भी बड़ी बेजार शक्ल में ,
झुर्रियों ,काले घेरों को घूर रहा….
परिपक्व हूँ; ऐसा सभी कहते,
पर बालमन ,जो दृग रहे भिगोता,
अंतस में कभी जागता कभी सोता,
अल्हड़पन सवार हो रहा ……
दस्तक देता अचानक अतिथि सा प्यार,
मरूस्थल में बहार की तरह आकर,
आँखों को कुछ पल सुकून देता,
पर हृदय; आज भी रिक्त ही रहा……
रिश्तों की रेलमपेल में इम्तिहान देती,
क्यों आज भी मैं तन्हा रह गई,
विचलित कर रहा इक सवाल ,
क्या पाया मैंनें इतने साल?……
समझौते को खुशियों का नाम दिया,
अपनी इच्छा को नज़रअंदाज कर,
कई भोर हुईं और कईं रातें गुजरी,
इक टीस साँसों के साथ बढ़ती गई ….
क्यों किया अन्याय खुद के साथ ?
क्यों भूल गई मुस्कुराना दिल से,हर बार ?
कड़वे अनुभव, कसैले व्यवहार के बीच,
विवश थी,निभाये हमेशा रस्म रिवाज़ ….
भूल गई अपनी पहचान अपना नाम,
अपना वजूद ,अपना ख्वाब ,दे दिया दान,
क्या बचा मेरा मुझमें,जो है;सब थोपा हुआ,
करती खुद से यही सवाल,आँखें हुईँ लाल…..
तभी आवाज आई..,”दरवाजा खोलो”,
“और वो मेज पर मोबाइल है लेकर आओ”,
“टिफ़िन और कार की चाबी दो”, “देर हो रही”,
फिर बन गई फिरकी भूल कर जज़्बात..
उम्र; चालीस पार कर चुकी हूँ ;और ,
दोहरी जिंदगी की आदत सी हो गई।।
#आशा_अमित_नशीने
परिचय-आशा अमित नशीने
W/o अमित नशीने
शिक्षा-बी. एस. सी.
एम. ए.(इंगलिश)
पी. जी. डी. सी. ए.
पता-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)